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उत्तराखण्ड

सिलक्यारा सुरंग के निकट बाबा बौखनाग मंदिर में आज होगा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम, मुख्यमंत्री धामी होंगे शामिल

सिलक्यारा सुरंग के निकट बाबा बौखनाग मंदिर में आज होगा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम, मुख्यमंत्री धामी होंगे शामिल
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लिया गया संकल्प अब साकार, आध्यात्मिक और बुनियादी विकास का प्रतीक बना स्थल

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे, जब वे उत्तरकाशी जिले में सिलक्यारा सुरंग के निकट नवनिर्मित बाबा बौखनाग मंदिर में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह आयोजन दोपहर 12 बजे संपन्न होगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुरंग के ब्रेकथ्रू स्थल पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

बाबा बौखनाग मंदिर का यह निर्माण केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है। वर्ष 2023 में जब सिलक्यारा सुरंग निर्माण के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ था, तब 41 श्रमिक 17 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे थे। उस समय देश और दुनिया की निगाहें उत्तराखंड पर टिकी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन ने वह कर दिखाया, जो एक मिसाल बन गया। सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना न केवल तकनीकी क्षमता का प्रमाण था, बल्कि मानवीय संवेदना की जीत भी थी।

इसी कठिन समय के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने बाबा बौखनाग मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था, जिसे अब मूर्त रूप दे दिया गया है। यह मंदिर उस विश्वास और संकल्प का प्रतीक है, जिसने कठिनाई की घड़ी में भी उम्मीद की लौ जलाए रखी।

सिलक्यारा सुरंग स्वयं में एक महत्त्वपूर्ण बुनियादी परियोजना है, जो चारधाम यात्रा को और सुगम बनाएगी। करीब 853 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह सुरंग 4.531 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें दो लेन और दो दिशाएं होंगी। इसके निर्माण से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की दूरी 26 किलोमीटर तक घट जाएगी। इससे न केवल तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यात्रा का समय और संसाधनों की बचत भी होगी।

आज का दिन आध्यात्मिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक ओर बाबा बौखनाग मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, श्रद्धा और आस्था का केंद्र बनेगी, तो दूसरी ओर सिलक्यारा सुरंग जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजना राज्य के विकास की दिशा में एक मजबूत कदम सिद्ध होगी।

उत्तराखंड के इतिहास में यह दिन एक ऐसी स्मृति बनकर दर्ज होगा, जो जनसेवा, संकल्प और समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

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