उत्तराखण्ड
यूनिवर्सिटी में छात्रों के गुटबाज़ी का विस्फोट, फायरिंग कांड के बाद 7 गिरफ्तार
यूनिवर्सिटी में छात्रों के गुटबाज़ी का विस्फोट, फायरिंग कांड के बाद 7 गिरफ्तार
देहरादून में शिक्षा के नाम पर चल रही अराजकता का एक और नमूना सामने आया है। यूनिवर्सिटी के अंदर पढ़ाई से ज्यादा गुटबाज़ी और दबंगई का खेल खेला जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ गए कि ब्वॉयज पीजी के बाहर हुई फायरिंग के बाद मामला खुलेआम सामने आ गया।
घटना की तह तक जाने पर यह साफ हुआ कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दो गुट आपसी वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी झगड़े में फायरिंग तक कर दी गई। इस विवाद के चलते सात छात्रों को गिरफ्तार कर भारी मुचलके पर पाबंद किया गया है।
गिरफ्तार छात्रों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- वैभव तिवारी (वाराणसी, यूपी)
- उत्तम सैनी (सहारनपुर, यूपी)
- मयंक चौहान (बिजनौर, यूपी)
- आयुष (अमरोहा, यूपी)
- युवराज (सहारनपुर, यूपी)
- अर्जुन (देवबंद, यूपी)
- दिव्य (बिजनौर, यूपी)
इनमें से कई छात्रों पर पहले से भी विवाद और गुटबाज़ी में शामिल होने के आरोप रहे हैं।
शिक्षा की जगह अराजकता
चौंकाने वाली बात यह है कि पढ़ाई के नाम पर यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेने वाले ये छात्र असल में गुंडागर्दी, फायरिंग और दादागिरी में उलझे हुए हैं। 2025 में अब तक 85 ऐसे छात्रों को विभिन्न यूनिवर्सिटियों से निष्कासित किया जा चुका है। सवाल यह है कि आखिर उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई से ज्यादा अपराध और दबंगई क्यों पनप रही है?
असल जिम्मेदारी किसकी?
गंभीर सवाल यह है कि क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन सो रहा था? क्यों लगातार विवाद और गुटबाज़ी को नजरअंदाज़ किया गया? छात्रों की जगह उपद्रवी तत्वों ने कैंपस को अपने ठिकाने में बदल लिया है। शिक्षा का माहौल तबाह हो रहा है और भविष्य की पीढ़ी अराजकता की भेंट चढ़ रही है।
यह सिर्फ छात्रों की गुंडागर्दी नहीं, बल्कि प्रशासन और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की विफलता है। जब तक कैंपस से अपराध और दबंगई का पूरी तरह सफाया नहीं होगा, तब तक “पढ़ाई” शब्द सिर्फ किताबों में ही लिखा रहेगा।







