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उत्तराखण्ड

बहुचर्चित निठारी कांड में मनिंदर और सुरेंद्र कोली की मौत की सजा हुई रद्द।

उत्तर प्रदेश: देश की एक बड़ी सनसनीखेज घटना के मामले में का चौंकाने वाला फैसला सामने आया। एक ऐसी वारदात जिसने उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में सनसनी फैला दी। इस सनसनी वारदात में गिरफ्तार किये गये अभियुक्तों के मामले में हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला आया है।

नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में इलाहाबाद HC ने दो मुख्य आरोपी की फांसी की सजा को रद्द कर दिया हैं। बात दे कि नोएडा के निठारी कांड में दो मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली की सजा को रद्द कर दिया हैं। सुरेंद्र कोली को 12 मामलों से बरी कर दिया गया। जबकि मोनिंदर सिंह पंढेर को जो फांसी की सजा मिली थी, उसे भी रद्द कर दिया गया हैं।

आपको बता दे कि हाई कोर्ट में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एसए हुसैन रिजवी की बेंच ने आरोपियों के पक्ष में ये फैसला सुनाया है। लेकिन अभी भी फैसले की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इलाहाबाद HC ने CBI कोर्ट गाजियाबाद के दिए गए फांसी की सजा के खिलाफ अपील दी थी, जिसको इलाहाबाद HC ने मंजूर कर ली हैं। अब इलाहाबाद HC ने इन दोनो को बरी कर दिया हैं।

जाने पूरा मामला..

बता दे कि 17 साल पहले नोएडा से एक सीरियल मर्डर केस काफी सुर्ख़ियों में था, जिसने सभी को दहला कर रख दिया था। यह पूरा मामला नोएडा के निठारी गांव का है। वही इसका खुलासा चब हुआ जब एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के गायब होने की शिकायत पुलिस में की थी। उस व्यक्ति की बेटी बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के घर में काम करती थी। जिसका घर नोएडा सेक्टर-31 के बंगले D-5 में रहता था। जब पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद अपनी जांच पड़ताल शुरु की, तब पता चला कि बच्चों का यौन शोषण किया जाता था और उसके बाद आरोपी उनका मर्डर कर देते थे। यह भी सामने आया कि सुरेंद्र कोली नेक्रोफीलिया की बीमारी से ग्रसित हो गया था। इस मानसिक व्याधि से पीड़ित लोग लाशों के साथ सेक्स करते हैं। ये भी आरोप लगा था कि मालिक और नौकर बच्चों को मारकर उनका अंग निकाल लेते थे।

सुरेन्द्र कोली अल्मोड़ा जिले के मगरूखाल का रहने वाला हैं।

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