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पढ़ाई की जगह गुंडागर्दी: देहरादून में हॉस्टलों पर छापा, 200 छात्र चेताए, 6 संचालक फंसे

 


पढ़ाई की जगह गुंडागर्दी: देहरादून में हॉस्टलों पर छापा, 200 छात्र चेताए, 6 संचालक फंसे

देहरादून में शिक्षा का माहौल बिगाड़ने वाले छात्रों पर अब शिकंजा कसने लगा है। पढ़ाई की जगह गुटबाज़ी, दबंगई और अपराध में उलझे छात्रों की वजह से यूनिवर्सिटियों और हॉस्टलों का हाल किसी अखाड़े जैसा हो गया है।

शिकायतें मिलने के बाद प्रेमनगर और विधौली इलाके के 12 हॉस्टलों और पीजी में देर रात छापामारी की गई। इस दौरान करीब 200 छात्रों को चेतावनी दी गई कि पढ़ाई छोड़कर अगर गुंडागर्दी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल हुए तो अगला ठिकाना कॉलेज नहीं, जेल होगा।

6 हॉस्टल संचालकों पर गाज

हैरानी की बात है कि कई हॉस्टल संचालकों ने अपने यहां रह रहे छात्रों का सत्यापन तक नहीं कराया था।

  • 6 संचालकों के खिलाफ पुलिस एक्ट में चालान हुआ
  • ₹60,000 का जुर्माना लगाया गया
    साथ ही सभी संचालकों को आदेश दिए गए कि सुरक्षा गार्ड नियुक्त करें और छात्रों के आने-जाने का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करें।

पढ़ाई का मंदिर या अपराध का अड्डा?

देहरादून के शैक्षिक संस्थान पढ़ाई से ज्यादा गुटबाज़ी और फायरिंग की खबरों से सुर्खियों में रहने लगे हैं। पिछले कुछ महीनों में छात्र राजनीति और बाहरी दबंगों की दखल ने माहौल पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

वर्ष 2025 में अब तक 85 छात्रों को विभिन्न यूनिवर्सिटियों से निष्कासित किया जा चुका है। सवाल यही है कि शिक्षा के नाम पर दाखिला लेने वाले ये छात्र आखिर किस राह पर जा रहे हैं?

जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वहाँ अब हथकड़ियाँ हैं।
जिन पैरों को क्लासरूम में होना चाहिए था, वो जेल की चौखट पर खड़े हैं।
यूनिवर्सिटी और हॉस्टल पढ़ाई के मंदिर नहीं, बल्कि अराजकता के अड्डे बनते जा रहे हैं—और असली जिम्मेदारी इन संस्थानों के प्रबंधन और लापरवाह संचालकों की है।

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