उत्तराखण्ड
रामनगर कृषि मंडी में कथित भ्रष्टाचार के आरोप, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की

रामनगर। रामनगर की कृषि मंडी में दुकानों के आवंटन और सरकारी बगीचे को लीज पर दिए जाने को लेकर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को एसडीएम गोपाल सिंह चौहान के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
ज्ञापन देने से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कृषि मंडी में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मंडी की दुकानों के आवंटन में नियमों को दरकिनार कर लाखों रुपये के कथित लेनदेन और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
कांग्रेस ने सरकारी बगीचे को निजी व्यक्ति को लीज पर दिए जाने के मामले पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि बगीचे की लीज प्रक्रिया में भी लाखों रुपये के अवैध लेनदेन की अपुष्ट जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
दुकानों के आवंटन से लेकर बगीचे की लीज तक उठे सवाल
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि कृषि मंडी में दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। इसके साथ ही सरकारी बगीचे को निजी व्यक्ति को लीज पर दिए जाने से जुड़े दस्तावेज, प्रक्रिया और कथित वित्तीय लेनदेन की भी जांच हो।
पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यदि सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों ने कृषि मंडी की कार्यप्रणाली और संपत्तियों के आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, फिलहाल आरोप राजनीतिक पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या मंडी की दुकानों के आवंटन तथा सरकारी बगीचे की लीज से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराई जाती है।
सरकारी संपत्ति के आवंटन में यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है तो जांच में सच्चाई सामने आने में किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए? और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?




