उत्तराखण्ड
5 साल की सत्ता का रिकॉर्ड: धामी ने तोड़ा नारायण दत्त तिवारी का कार्यकाल, अब कामकाज का फैसला करेगी जनता
रामनगर/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद पर लगातार पांच वर्ष पूरे करते हुए राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इससे पहले यह उपलब्धि पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के नाम दर्ज थी।
इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश में उत्सव मना रही है। पार्टी कार्यकर्ता इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए जश्न मना रहे हैं और धामी के नेतृत्व को उत्तराखंड की राजनीति का नया अध्याय बता रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस रिकॉर्ड के साथ एक दूसरी बहस भी तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड ही बना है, या फिर विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर भी कोई ऐसा रिकॉर्ड बना है, जिसे जनता आने वाले वर्षों तक याद रखेगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यकाल की लंबाई अपने आप में उपलब्धि हो सकती है, लेकिन किसी सरकार की वास्तविक सफलता उसके फैसलों, नीतियों और जनता के जीवन में आए बदलाव से तय होती है।
बीते पांच वर्षों में धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC), नकल विरोधी कानून, निवेश आकर्षित करने, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई बड़े फैसलों को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश किया है। वहीं विपक्ष बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, भ्रष्टाचार के आरोपों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है।
अब जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यकाल का नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है, तो सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह रिकॉर्ड केवल राजनीतिक इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा, या फिर जनता इसे बेहतर शासन और प्रभावी कामकाज के रिकॉर्ड के रूप में भी याद रखेगी।
आखिरकार लोकतंत्र में अंतिम फैसला न सत्ता का होता है, न विपक्ष का। जनता ही तय करती है कि इतिहास में किसी नेता की पहचान लंबे समय तक कुर्सी पर रहने से बनेगी या उसके काम से।




