उत्तराखण्ड
वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने की मांग ने पकड़ी रफ्तार, चार गांवों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत किया दावा प्रस्तुत
रामनगर, 30 जून। रामनगर क्षेत्र के वन ग्राम सुन्दर खाल, देवी चौड़ा, चौफुला और धनगढी को राजस्व ग्राम घोषित कराने की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। चारों गांवों की ग्राम स्तरीय वनाधिकार समितियों ने वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उपखंड स्तरीय समिति के समक्ष विधिवत दावा प्रस्तुत करते हुए ऐतिहासिक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का पूरा अभिलेख सौंप दिया है।
समिति के अध्यक्ष प्रेम राम ने बताया कि अधिनियम की धारा 3(1)(h) के तहत 13 दिसंबर 2005 से पूर्व वन भूमि पर निवास कर रहे समुदायों को राजस्व ग्राम का अधिकार दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्देशों के अनुसार जनवरी 2025 में ग्राम स्तरीय वनाधिकार समितियों का गठन किया गया था तथा अप्रैल 2026 में आयोजित खुली ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से दावा प्रस्तुत करने का प्रस्ताव पारित किया था।
समिति के सचिव नंदकिशोर ने बताया कि इन गांवों में चंद्रवंशी राजाओं के समय से लोगों के निवास के प्रमाण रामनगर वन प्रभाग की पुरानी वर्किंग प्लान रिपोर्टों में दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार तीन पीढ़ियों के निवास के दो प्रमाण पर्याप्त होते हैं, जबकि समिति ने अपने दावे के समर्थन में आधा दर्जन से अधिक ऐतिहासिक और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
80 वर्षीय ग्रामीण खीमराम ने कहा कि वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने का सपना कई दशकों से अधूरा है। उन्हें उम्मीद है कि अब कानून के तहत उनकी आने वाली पीढ़ियों को भूमि अधिकार और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
महिला एकता मंच की कौशल्या ने कहा कि रामपुर लेटी और चौपड़ा जैसे गांवों को इसी कानून के तहत राजस्व ग्राम का दर्जा मिल चुका है। ऐसे में इन चार वन ग्रामों को भी शीघ्र न्याय मिलना चाहिए।
ग्रामीणों ने उपखंड स्तरीय समिति से मांग की है कि प्रस्तुत ऐतिहासिक साक्ष्यों का शीघ्र परीक्षण कर सुन्दर खाल, देवी चौड़ा, चौफुला और धनगढी को जल्द से जल्द राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।
दावा प्रस्तुत करने के दौरान विमला देवी, पूरनराम, सुनील कुमार, अमित सिंह, उत्तम चंद्र और दिनेश कुमार सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।




