उत्तराखण्ड
रामनगर अस्पताल में इलाज की उम्मीद बनाम हकीकत: स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर धरने पर बैठे लोग

रामनगर। रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सोमवार को लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। अस्पताल में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी दूर करने की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न संगठनों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रामनगर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। संयुक्त चिकित्सालय रामनगर के अलावा मालधन, कानिया और पीरूमदारा जैसे क्षेत्रों में भी मानकों के अनुरूप चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने को मजबूर होना पड़ता है।
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती के संचालन में हुई सभा में वक्ताओं ने सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल उठाए। वक्ताओं का कहना था कि विज्ञापनों और सरकारी दावों में स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर जितनी बेहतर दिखाई जाती है, जमीनी हकीकत उससे अलग है।
100 बेड के अस्पताल के मानकों के अनुरूप सुविधाओं की मांग
प्रदर्शनकारियों ने रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय को 100 बेड के अस्पताल के मानकों के अनुरूप विकसित करने की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल और स्थानीय विधायक को भेजे गए ज्ञापन में अस्पताल में लंबे समय से खाली चल रहे चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के पदों पर तत्काल नियमित नियुक्ति की मांग की गई।
ज्ञापन में फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ईएमओ, ईएनटी सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ सहित चिकित्साधिकारियों के रिक्त पद भरने की मांग उठाई गई है। इसके अलावा चीफ फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य निरीक्षक, नर्सिंग सहायक और लैब टेक्नीशियन के पदों पर भी नियुक्तियां करने की मांग की गई।
CT स्कैन, ICU और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं पर भी सवाल
संयुक्त संघर्ष समिति ने अस्पताल में सीटी स्कैन, आईसीयू, ब्लड बैंक और वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को शीघ्र बहाल करने की मांग की है।
जनहित का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस अस्पताल पर रामनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी निर्भर है, वहां गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। दुर्घटना, गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में यदि मरीज को तत्काल बेहतर उपचार नहीं मिल पाता तो उसे रेफर करना ही विकल्प रह जाता है। ऐसे में अस्पताल की वास्तविक क्षमता और सरकारी दावों के बीच का अंतर सीधे आम मरीज की जिंदगी और जेब पर असर डालता है।
अब चलेगा हस्ताक्षर अभियान
संयुक्त संघर्ष समिति ने स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे को आंदोलन का रूप देने का ऐलान किया है। समिति के अनुसार रामनगर तहसील क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर बैठकें कर लोगों को स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे से जोड़ा जाएगा और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
सोमवार को संयुक्त चिकित्सालय परिसर में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में 117 लोगों ने हस्ताक्षर कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग का समर्थन किया।
धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने वालों में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष मनिन्दर सिंह सेठी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, उपपा नगर संयोजक आसिफ, समाजवादी लोकमंच के संयोजक मुनीष कुमार, गिरीश चंद्र आर्या, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की शीला शर्मा, तुलसी छिम्बाल, महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, राज्य आंदोलनकारी हाफिज सईद अहमद, योगेश सती, ठेका मजदूर कल्याण समिति के किशन शर्मा, समाजसेवी राहुल दरम्वाल, पूर्व सभासद तहसीन खान ‘टीके’, सुमन जोशी, लालमणि, किरण आर्य, सुनील पर्नवाल, जगमोहन सिंह रावत, राजेंद्र सिंह, बीडी नैनवाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अब देखना यह है कि धरना, ज्ञापन और हस्ताक्षर अभियान के बाद स्वास्थ्य विभाग इस सवाल का जवाब कब देता है—रामनगर के सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज की जरूरी सुविधाएं कब मिलेंगी?




