उत्तराखण्ड
‘मोदी देवदूत, भारत चौथे नंबर!’ रामनगर में बंशीधर भगत का बड़ा दावा, 2027 के टिकट पर भी सियासी ‘भक्ति’ का इम्तिहान
सरस मेले में बंशीधर भगत का ‘मोदी भक्ति’ वाला भाषण, बोले- मोदी ‘देवदूत’ बनकर आए
रामनगर। रामनगर में आयोजित सरस मेले में भाजपा के वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत का दिया गया भाषण अब राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। मंच से भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘देवदूत’ तक बता दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले भारत को दुनिया का सबसे ज्यादा कर्जवान देश बताया और दावा किया कि अब देश आर्थिक क्षेत्र में विश्व में चौथे नंबर पर पहुंच गया है तथा जल्द तीसरे नंबर पर आ जाएगा।
भगत के इस दावे पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि भारत को मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले दुनिया का सबसे ज्यादा कर्जवान देश बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वहीं अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में भी पैमाना महत्वपूर्ण है। Nominal GDP के आधार पर भारत अभी दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि PPP (Purchasing Power Parity) के आधार पर भारत तीसरे स्थान पर है। ऐसे में मंच से बोले गए आंकड़ों और वास्तविक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के बीच फर्क साफ दिखाई देता है।
‘देवदूत’ मोदी और ‘वरदहस्त’ धामी की तारीफ
सरस मेले के मंच से भगत ने प्रधानमंत्री मोदी को देश की तस्वीर बदलने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि मोदी देश में ‘देवदूत’ बनकर आए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की भी उन्होंने जमकर प्रशंसा की।
भगत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘वरदहस्त’ के कारण धामी सरकार उत्तराखंड में तमाम विकास योजनाएं चला रही है। भाषण के दौरान मोदी और धामी की तारीफ का सिलसिला लगातार जारी रहा।
भगत के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसमें वह मंच से ये बातें कहते नजर आ रहे हैं।
भाषण में विकास से ज्यादा 2027 की सियासत की झलक?
बंशीधर भगत उत्तराखंड भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं और लगातार कई बार विधायक रहे नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कालाढूंगी विधानसभा सीट से भाजपा के भीतर नए दावेदारों की सक्रियता की चर्चा है। पार्टी अगर इस बार पुराने चेहरों की जगह नए चेहरों को मौका देने की रणनीति अपनाती है तो भगत के सामने टिकट बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
भगत पहले ही सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि ‘कालाढूंगी मेरी सीट है।’ राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को सिर्फ भावनात्मक दावा नहीं बल्कि पार्टी नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
टिकट कटा तो बेटे के लिए रास्ता?
भाजपा में यदि उम्र और नए चेहरे के फार्मूले पर टिकटों में बदलाव होता है तो कालाढूंगी सीट पर सबसे दिलचस्प सवाल यह होगा कि पार्टी किसे मैदान में उतारती है।
चर्चा यह भी है कि यदि बंशीधर भगत स्वयं चुनाव मैदान में नहीं रहते हैं तो वह अपने पुत्र विकास भगत के लिए टिकट की पैरवी कर सकते हैं। हालांकि यह फिलहाल राजनीतिक चर्चा है और भाजपा की ओर से 2027 के लिए किसी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं हुई है।
रामनगर के सरस मेले में दिया गया भगत का भाषण इसलिए भी चर्चा में है कि एक तरफ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व को लेकर बेहद उत्साहपूर्ण दावे किए, वहीं दूसरी तरफ उनके राजनीतिक भविष्य और कालाढूंगी सीट को लेकर चल रही चर्चाओं ने इसे 2027 की सियासत से जोड़ने का मौका दे दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कालाढूंगी की ‘अपनी सीट’ बताने वाले भगत के साथ 2027 में पार्टी पुराना भरोसा कायम रखती है या भाजपा का ‘नए चेहरे’ वाला प्रयोग वहां भी दिखाई देता है।





