उत्तराखण्ड
हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी महेश टम्टा न्यायिक हिरासत में, सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद किया समर्पण
रामनगर। वर्ष 2019 में कृषक चंद्रशेखर टम्टा पर हुए जानलेवा हमले के मामले में लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहे आरोपी महेश टम्टा उर्फ महेश चंद्रा को मंगलवार को न्यायालय से राहत नहीं मिल सकी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष समर्पण करने के बाद आरोपी की ओर से दाखिल जमानत अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में हल्द्वानी स्थित उप कारागार भेज दिया गया।
मामला 2 अक्टूबर 2019 यानी गांधी जयंती के दिन छोई स्थित बलवीर गार्डन में हुई घटना से जुड़ा है। चूनाखान-बैलपोखरा निवासी कृषक चंद्रशेखर टम्टा पर अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली चलाए जाने का आरोप है। हमले में चंद्रशेखर गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनके पुत्र हेमंत शेखर की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान गोली चलाने के आरोप में कथित शूटरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने विवेचना में दिल्ली निवासी महेश टम्टा उर्फ महेश चंद्रा की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया। इसी आधार पर मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 के साथ धारा 120-बी भी जोड़ी गई और महेश टम्टा को कथित आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा आरोपी बनाया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर उसके दिल्ली स्थित आवास की कुर्की की कार्रवाई की गई थी। साथ ही उसकी गिरफ्तारी के लिए पहले 25 हजार और बाद में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
मामले में आरोपी को 29 सितंबर 2023 को नैनीताल हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत बाद में रद्द कर दी गई। अदालत के समक्ष मामले की कार्यवाही में विलंब और मुकदमे के संचालन से जुड़े तथ्यों को भी न्यायिक प्रक्रिया में विचार का विषय बनाया गया।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत रद्द करने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए आरोपी को मुकदमे में सहयोग करने और कार्यवाही में विलंब करने वाली रणनीति से बचने के निर्देश दिए थे। साथ ही परिस्थितियों के अनुरूप आगे जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता खुला रखा गया था।
इसके बाद आरोपी ने स्थानीय न्यायालय में समर्पण किया था। स्वास्थ्य संबंधी आधार पर उसे मिली जमानत को लेकर वादी पक्ष ने दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने नियमित जमानत रद्द करते हुए आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष समर्पण करने का निर्देश दिया। इस आदेश के खिलाफ भी आरोपी को सर्वोच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली।
इसी न्यायिक घटनाक्रम के बाद मंगलवार को महेश टम्टा ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष समर्पण किया और जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अदालत ने जमानत अर्जी अस्वीकार करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्देश दिए।
मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में
यह पूरा मामला अभी विचारणाधीन है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और न्यायालय के निर्णय के आधार पर होगा। वर्तमान कार्रवाई को आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मंगलवार को अदालत द्वारा जमानत से इनकार के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।




