उत्तराखण्ड
रामनगर में सागौन तस्करी का बड़ा खुलासा, भूसे के ढेर में छिपाकर रखा था बेशकीमती लकड़ी का जखीरा
रामनगर। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की टीम ने सागौन तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कार्रवाई के दौरान सागौन की लकड़ी से भरा एक छोटा हाथी वाहन, एक मोटरसाइकिल और भारी मात्रा में अवैध सागौन प्रकाष्ठ बरामद किया गया। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
वन विभाग के अनुसार रामनगर रेंज और वन सुरक्षा दल की संयुक्त टीम ने वन अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक संदिग्ध वाहन को पकड़ा। जांच में वाहन से सागौन के चार गिल्ट बरामद हुए। मौके से एक हीरो मोटरसाइकिल भी कब्जे में ली गई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर वन विभाग की टीम ने काशीपुर रेंज के ग्राम लक्ष्मीपुर लच्छी में छापेमारी की। वहां भूसे के ढेर में बड़ी चालाकी से छिपाकर रखे गए सागौन के 11 नग बरामद किए गए। बरामद लकड़ी को वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया है।
वन अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार आरोपियों का नाम पहले भी कई वन अपराधों में सामने आ चुका है। विभाग के अनुसार ये लोग लंबे समय से अवैध वन गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और इनकी तलाश की जा रही थी। इससे संकेत मिलता है कि जंगलों की बेशकीमती संपदा पर डाका डालने का यह कोई पहला मामला नहीं है।
सागौन जैसी कीमती लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि जंगलों के प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीवों के आवास के लिए भी गंभीर खतरा बनती है। तराई क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह सवाल भी उठता है कि आखिर वन माफिया किस तरह जंगलों तक पहुंच बना रहे हैं और उनकी गतिविधियां इतने लंबे समय तक कैसे जारी रहती हैं।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में हल्द्वानी जेल भेज दिया गया। मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927 समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जंगलों की हरियाली पर कुल्हाड़ी चलाने वाले तस्करों के खिलाफ यह कार्रवाई भले ही एक सफलता मानी जाए, लेकिन असली चुनौती उन नेटवर्कों तक पहुंचने की है जो जंगल की बेशकीमती लकड़ी को काले कारोबार में बदल रहे हैं।




