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उत्तराखण्ड

बीरों देवल में मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में शामिल हुए सीएम धामी, पुनर्निर्माण व नई तहसील भवन की घोषणा

रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि ब्लॉक स्थित ग्राम बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा शुक्रवार को राजनीतिक और धार्मिक दोनों मायनों में अहम पड़ाव बन गई, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं यहां पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महायज्ञ में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने मां चंडिका मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि मां चंडिका मंदिर प्रांगण और मंदिर समूह का पुनर्निर्माण पुरातत्व विभाग के माध्यम से कराया जाएगा, साथ ही बसुकेदार तहसील में नए तहसील भवन का निर्माण भी किया जाएगा। इन घोषणाओं को स्थानीय विकास और धार्मिक पर्यटन से जोड़कर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को “सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण” करार दिया। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह दिवारा यात्रा उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है। उनके मुताबिक ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।

सांस्कृतिक विरासत और राजनीति का संगम

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश “सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण” के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत को वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में काम हो रहा है और भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर सम्मान मिल रहा है।
उन्होंने 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि आज “दिव्य और भव्य केदार” इसका प्रमाण है। साथ ही यह भी दोहराया कि राज्य सरकार धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

कानून, जमीन और ‘देवभूमि’ का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सख्त संदेश देते हुए कहा कि “देवभूमि के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई” की जा रही है। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-निरोधक प्रावधान और अतिक्रमण हटाने जैसे कदम इसी अभियान का हिस्सा हैं। उनके अनुसार राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है।
इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला अग्रणी राज्य बताते हुए कहा कि सरकार सांस्कृतिक अस्मिता और विकास—दोनों मोर्चों पर समानांतर काम कर रही है।

20 साल बाद निकली दिवारा यात्रा, 26 गांवों का भ्रमण

मां चंडिका की दिवारा यात्रा 21 नवंबर 2025 से शुरू होकर करीब 26 गांवों का भ्रमण कर रही है। लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस यात्रा ने क्षेत्र में व्यापक जनभागीदारी और धार्मिक उत्साह पैदा किया है।
बीरों देवल में 15 फरवरी से 9 दिवसीय महायज्ञ चल रहा है, जिसकी 22 फरवरी को विशाल जलयात्रा और 24 फरवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ समापन होगा, जिसके बाद मां अपने दिव्य स्थल पर विराजमान होंगी।

जनप्रतिनिधियों ने सौंपा मांग पत्र
कार्यक्रम के दौरान विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल ने क्षेत्र की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने मांगों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस दौरान विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष रितु नेगी, ब्लॉक प्रमुख भुवनेश्वरी देवी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण, महिला आयोग उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत समेत प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।

धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक संदेश—तीनों के संगम के रूप में देखी जा रही मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है, जिस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।

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