उत्तराखण्ड
बार के बिल से शुरू हुआ विवाद बना खूनी खेल, ‘रोड रेज’ की कहानी निकली झूठ, 4 गिरफ्तार
देहरादून के राजपुर क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग की मौत के पीछे की सच्चाई अब सामने आ गई है। जिसे पहले सड़क पर ओवरटेकिंग यानी रोड रेज का मामला बताया जा रहा था, वह दरअसल एक बार में हुए झगड़े की खूनी परिणति निकली। मामूली बिल विवाद ने अगले ही दिन गोलियों की बौछार में एक निर्दोष की जान ले ली।
30 मार्च की सुबह जोहड़ी गांव में हुई फायरिंग में 74 वर्षीय मुकेश कुमार जोशी की मौत हो गई थी। शुरुआती कहानी में इसे रोड रेज बताया गया, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि असली विवाद एक रात पहले कुठालगेट स्थित ZEN-Z बार में शुरू हुआ था।
बताया गया कि 29 मार्च की रात बार में आए युवकों—शांतनु त्यागी, आदित्य चौधरी, कविश त्यागी और उनके साथियों का बिल कम कराने को लेकर बार कर्मचारियों से झगड़ा हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि बार कर्मियों ने गुस्से में स्कॉर्पियो गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। जाते-जाते युवक धमकी देकर निकले थे—और अगली सुबह वही धमकी गोलियों में बदल गई।
अगले दिन सुबह जब बार कर्मचारी फार्च्यूनर कार में कहीं जा रहे थे, तभी स्कॉर्पियो सवार युवकों ने उन्हें देख लिया और पीछा शुरू कर दिया। उन्हें रोकने के लिए स्कॉर्पियो सवारों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में फार्च्यूनर सवारों ने भी तमंचों से गोली चलाई। सड़क पर चल रही इस अंधाधुंध फायरिंग के बीच मॉर्निंग वॉक पर निकले मुकेश जोशी गोली का शिकार बन गए।
फायरिंग के दौरान फार्च्यूनर कार जोहड़ी गांव के पास पेड़ से टकरा गई। इसके बाद स्कॉर्पियो सवारों ने लोहे की रॉड और डंडों से कार सवारों पर हमला कर दिया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और हमलावर फरार हो गए।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने इसे रोड रेज का रंग देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती में सच सामने आ गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह पूरी वारदात बदले की भावना में की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है—रोहित कुमार (उत्तम नगर, दिल्ली), मौ0 अखलाक उर्फ साबिर (खगरिया, बिहार), संदीप कुमार (बार संचालक, दिल्ली) और आदित्य चौधरी (रायपुर, देहरादून)। वहीं शांतनु त्यागी, कविश त्यागी, समीर चौधरी और वैभव अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
घटना में इस्तेमाल 2 देसी तमंचे, जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट की स्कॉर्पियो भी बरामद की गई है। जिस ZEN-Z बार में यह विवाद शुरू हुआ था, उसे बंद कर सील कर दिया गया है और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस लापरवाही और गुंडागर्दी की मिसाल है जहां छोटी-छोटी बातों पर हथियार निकल आते हैं और इसकी कीमत किसी निर्दोष को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। देहरादून की सड़कों पर चली यह गोली दरअसल उस सिस्टम पर भी सवाल है, जहां बार के झगड़े सीधे सड़कों पर मौत का खेल बन जाते हैं।




