उत्तराखण्ड
“रामनगर की गड्ढायुक्त सड़कों पर मंडलायुक्त की नजर, 15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त करने का अल्टीमेटम”
कोसी पुल से पालिका क्षेत्र तक सड़कें देखीं, अफसरों को गुणवत्ता के साथ समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

रामनगर। मुख्यमंत्री के सचिव और कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत सोमवार को रामनगर पहुंचे तो इस बार सरकारी फाइलों के बजाय सड़क की हकीकत देखने का मौका भी मिला। रामनगर-हल्द्वानी नए कोसी पुल से शहीद भगत सिंह चौक होते हुए नगर पालिका क्षेत्र तक मंडलायुक्त ने सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क की स्थिति, यातायात व्यवस्था और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं को देखा गया।
सड़क पर जगह-जगह नजर आने वाले गड्ढों और यातायात में आने वाली दिक्कतों को लेकर मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 अक्टूबर तक सड़कों को हर हाल में गड्ढामुक्त किया जाए।
यानी फिलहाल रामनगर की सड़कों को राहत की तारीख मिल गई है—अब देखना यह होगा कि 15 अक्टूबर तक गड्ढे भरते हैं या फिर गड्ढों को भरने के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है। क्योंकि सड़क पर गड्ढे जितने पुराने होते हैं, उनके मरम्मत के आश्वासन भी अक्सर उतने ही पुराने दिखाई देते हैं।
मंडलायुक्त ने अधिकारियों को सड़क मरम्मत में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क पर ऐसा कोई गड्ढा या स्थिति नहीं रहनी चाहिए, जिससे आम लोगों के आवागमन में बाधा पैदा हो। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत कराने को भी कहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा और सुगम यातायात सीधे आम जनता से जुड़े विषय हैं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, शिथिलता या हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को आपसी समन्वय से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।
अब असली परीक्षा आदेश की नहीं, अमल की है। मंडलायुक्त ने सड़कें देख लीं और अधिकारियों को तारीख भी दे दी है। ऐसे में 15 अक्टूबर के बाद रामनगर की जनता यह जरूर देखना चाहेगी कि सड़कें वास्तव में गड्ढामुक्त हुईं या फिर गड्ढों के ऊपर एक और मरम्मत का लेप चढ़ाकर कहानी आगे बढ़ा दी गई।
निरीक्षण के दौरान गोपाल सिंह चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कोसी पुल से नगर पालिका क्षेत्र तक सड़कें देखीं; अफसरों को गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर सख्ती, अब देखना है आदेश सड़क पर कितना उतरता है।




