उत्तराखण्ड
रामनगर नगर पालिका के कार्यों की जांच के लिए डीएम ने गठित की समिति
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के निर्देश पर समिति गठित, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
रामनगर/हल्द्वानी, 28 सितंबर 2026।
रामनगर नगर पालिका के कामकाज और विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर सामने आए सवालों के बीच जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जांच समिति का गठन किया है। यह कार्रवाई कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत के नगर पालिका निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के क्रम में की गई है।
जिलाधिकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद रामनगर की ओर से बताया गया है कि कूड़े और सिंगल यूज प्लास्टिक के निस्तारण के लिए झील विकास प्राधिकरण के हल्द्वानी स्थित प्लास्टिक प्लांट का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, उक्त प्लांट के वर्तमान में क्रियाशील नहीं होने की सूचना है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति के साथ-साथ इसके पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की जांच आवश्यक मानी गई है।
एसडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित
मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी रामनगर की अध्यक्षता में समिति गठित की है। उप कोषाधिकारी रामनगर को समिति का सदस्य बनाया गया है।
समिति को नगर पालिका की व्यवस्थाओं का अभिलेखीय और स्थलीय परीक्षण करते हुए तथ्यात्मक एवं बिंदुवार जांच रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
कूड़ा और प्लास्टिक निस्तारण की होगी जांच
जांच समिति यह पता लगाएगी कि नगर पालिका द्वारा वर्तमान में कूड़े और सिंगल यूज प्लास्टिक का निस्तारण कहां और किस तरीके से किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित अभिलेखों और मौके की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा।
इसके अलावा पर्यावरणीय प्रभाव और जनस्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
रसायनों की खरीद और स्टॉक का भी होगा मिलान
जांच में नगर पालिका में इस्तेमाल होने वाले ब्लीचिंग पाउडर, डीबीटी और अन्य आवश्यक रसायनों के चालू वित्तीय वर्ष के स्टॉक, खरीद और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों की भी जांच की जाएगी।
समिति यह देखेगी कि खरीदी गई सामग्री का रिकॉर्ड
नियमानुसार दर्ज है या नहीं और स्टॉक रजिस्टर में संबंधित प्रविष्टियां विधिवत की गई हैं या नहीं।
कर्मचारियों और पर्यावरण मित्रों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी जांच के दायरे में
नगर पालिका के कार्मिकों और पर्यावरण मित्रों की शासन द्वारा निर्धारित एसओपी के अनुरूप बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होने की स्थिति भी जांची जाएगी।
यानी जांच सिर्फ कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित व्यवस्थाओं का मौके पर भी परीक्षण किया जाएगा।
15 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
जिलाधिकारी ने जांच समिति को निर्देश दिए हैं कि वह सभी संबंधित साक्ष्यों और अभिलेखों के साथ 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक, स्पष्ट और बिंदुवार जांच आख्या जिलाधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराए।
गौरतलब है कि इससे पहले कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने रामनगर नगर पालिका का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण, स्टोर रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक उपस्थिति और पशु बाजार से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर कई निर्देश दिए गए थे। अब जिलाधिकारी स्तर से जांच समिति के गठन के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली से जुड़े इन मामलों की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट के जरिए सामने आने की उम्मीद है।




