उत्तराखण्ड
फायरिंग की झूठी सूचना से मचा हड़कंप, मौके पर पहुंची टीम तो निकला आपसी विवाद
देहरादून। राजधानी देहरादून के नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में फायरिंग की सूचना मिलने के बाद देर रात हड़कंप मच गया। कंट्रोल रूम 112 पर मिली सूचना के आधार पर जब टीम मौके पर पहुंची तो मामला फायरिंग का नहीं बल्कि दो लोगों के बीच आपसी विवाद और मारपीट का निकला।
जानकारी के अनुसार 4 जून की देर रात डिफेंस कॉलोनी क्षेत्र से दो पक्षों के बीच झगड़े और फायरिंग की सूचना कंट्रोल रूम को दी गई थी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि दो व्यक्ति किसी बात को लेकर आपस में उलझे हुए थे। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर फायरिंग की कोई घटना सामने नहीं आई।
बताया गया कि झगड़े में शामिल व्यक्तियों द्वारा ही फायरिंग की सूचना दी गई थी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि वे एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दे रहे थे। इसके बाद दोनों को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान गिरीश सिंह डियोडी (42 वर्ष) और हिमांशु भट्ट (31 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में रह रहे हैं।
झूठी सूचनाएं बन रही हैं बड़ी समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि फायरिंग, बम, दुर्घटना या अन्य गंभीर घटनाओं की झूठी सूचनाएं न केवल सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, बल्कि वास्तविक आपात स्थितियों में मदद पहुंचाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। कई बार ऐसी झूठी सूचनाओं के कारण पूरे इलाके में भय और अफवाहों का माहौल बन जाता है।
देहरादून समेत प्रदेश के कई शहरों में पिछले कुछ वर्षों में झूठी सूचनाओं के मामले सामने आए हैं, जिनमें निजी विवाद, नशे की हालत या व्यक्तिगत रंजिशों के चलते लोगों ने आपातकालीन सेवाओं का दुरुपयोग किया। ऐसे मामलों को लेकर प्रशासन लगातार लोगों से जिम्मेदारी के साथ आपातकालीन नंबरों का इस्तेमाल करने की अपील करता रहा है।




