उत्तराखण्ड
खटीमा में तेज रफ्तार स्कूल बस बनी काल: बाइक सवार तीन युवकों की मौत, परिवारों में मचा कोहराम
खटीमा (ऊधमसिंह नगर)।
शुक्रवार की शाम प्रतापपुर क्षेत्र में ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने तीन घरों की खुशियां एक झटके में उजाड़ दीं। तेज रफ्तार से आ रही एक निजी स्कूल बस ने बाइक सवार तीन युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि तीनों युवकों की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद चालक बस छोड़कर मौके से फरार हो गया।
यह हृदयविदारक दुर्घटना प्रतापपुर नंबर नौ के पास हुई। जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र नानकमत्ता के प्रतापपुर नंबर सात निवासी
देवेंद्र सिंह (24) पुत्र उमेश सिंह,
राजेश सिंह (26) पुत्र दर्शन सिंह,
राजेश सिंह (34) पुत्र पंचम सिंह
शुक्रवार शाम करीब 4:15 बजे झनकट से बाइक पर सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। बाइक देवेंद्र चला रहा था। इसी दौरान सामने से तेज गति से आ रही नानकमत्ता स्थित एक निजी स्कूल बस ने उनकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी।
अस्पताल पहुंचने से पहले टूट चुकी थी जिंदगी की डोर
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग उन्हें तत्काल खटीमा उप जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल परिसर में उस वक्त का दृश्य बेहद दर्दनाक था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। माताएं, बहनें और परिजन बेसुध होकर जमीन पर बैठ गए — मानो एक ही पल में उनकी पूरी दुनिया उजड़ गई हो।
मजदूरी कर चलाते थे घर, अब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
परिजनों के मुताबिक
देवेंद्र और राजेश (पुत्र पंचम सिंह) राजमिस्त्री का काम करते थे, जबकि राजेश (पुत्र दर्शन सिंह) उनके साथ मजदूरी करता था। तीनों रोज मेहनत कर अपने परिवारों का पेट पालते थे। शुक्रवार को भी वे झनकट से कुछ सामान लेकर घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में मौत ने उन्हें घेर लिया।
अब इन परिवारों के सामने सिर्फ अपनों को खोने का गम ही नहीं, बल्कि रोजी-रोटी का भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
चालक फरार, पुलिस कर रही तलाश
प्रतापपुर चौकी प्रभारी राजेंद्र पंत ने बताया कि तीनों शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया गया है और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। बस चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है —
सड़कों पर दौड़ती तेज रफ्तार गाड़ियां कब तक मासूम जिंदगियां निगलती रहेंगी?
तीन युवा जिनके कंधों पर घर की जिम्मेदारी थी, अब सिर्फ याद बनकर रह गए।




