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उत्तराखण्ड

हौसलों की उड़ान: रामनगर की पुष्पा देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रामनगर (नैनीताल)।

जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ सामने आ जाती हैं, जब इंसान के सामने दो ही रास्ते होते हैं—या तो हार मान लेना या फिर संघर्ष कर नई राह बनाना। रामनगर क्षेत्र की निवासी श्रीमती पुष्पा देवी ने दूसरा रास्ता चुना और आज वह साहस, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं।
पुष्पा देवी के जीवन में एक समय ऐसा आया जब उनके पति का असमय निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारियाँ अचानक उनके कंधों पर आ गईं। घर-परिवार का भविष्य, बच्चों की परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतें—इन सबके बीच उनके सामने कई चुनौतियाँ खड़ी थीं। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।
इसी दौरान उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने REAP परियोजना से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया। इस परियोजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। यह सहयोग उनके लिए नई शुरुआत की मजबूत नींव साबित हुआ।
इस आर्थिक सहायता के सहारे पुष्पा देवी ने अपने घर से ही “मेघा बुटीक सेंटर” के नाम से सिलाई और बुटीक का काम शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत, धैर्य और लगन के साथ उन्होंने अपने काम को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। उनके काम की गुणवत्ता और मेहनत ने जल्द ही पहचान बनानी शुरू कर दी।
आज स्थिति यह है कि पुष्पा देवी अपने इस कार्य से प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि अगर हौसला और अवसर मिल जाए तो कोई भी मुश्किल रास्ता आसान बन सकता है।
पुष्पा देवी अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी ही नहीं संभाल रहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाई जा रही योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव भी अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सरकारी योजनाओं और REAP परियोजना के सहयोग से कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
पुष्पा देवी कहती हैं कि यदि सरकार की यह योजना और सहयोग उन्हें न मिला होता, तो शायद जीवन की इस कठिन परिस्थिति से उबरना इतना आसान नहीं होता। वह मुख्यमंत्री और REAP परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पुष्पा देवी की यह कहानी यह संदेश देती है कि हौसला, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो हर महिला अपने जीवन की दिशा बदल सकती है और समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।
दरअसल, पुष्पा देवी की कहानी केवल संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नए जीवन की शुरुआत की एक प्रेरक दास्तान है।

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