उत्तराखण्ड
जंगल की चौखट से आत्मनिर्भरता की राह: ढेला की 10 महिलाओं ने सीखा जूट बैग बनाना
रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन की पहल से ढेला गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खुली है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व रामनगर के सौजन्य से 9 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक ढेला रेंज के अंतर्गत ग्राम ढेला में ‘महिला प्रशिक्षण वेलफेयर डेवलपमेंट’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
पुष्कर सोसाइटी रामनगर द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा आर्थिक रूप से सशक्त करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को जूट के बैग बनाने का हुनर सिखाया गया।
प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं में कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वरोजगार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे ग्रामीण महिलाओं की जंगल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के तहत ढेला गांव की 10 महिलाओं को जूट के बैग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को उप प्रभागीय वनाधिकारी कालाढूंगी श्री बिन्दरपाल द्वारा प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
ग्राम प्रधान ढेला ने कॉर्बेट प्रशासन की इस पहल के लिए आभार जताते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने का आग्रह किया।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उप प्रभागीय वनाधिकारी कालागढ श्री बिन्दरपाल, वन क्षेत्राधिकारी ढेला श्री नवीन चन्द्र पाण्डे, ग्राम प्रधान श्रीमती आशा रावत, श्री प्रताप रावत, पुष्कर सोसाइटी रामनगर की डायरेक्टर श्रीमती पूनम गुप्ता सहित प्रशिक्षक पुष्कर सोसाइटी रामनगर के प्रतिनिधि और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं में नीता चौहान, बुशरा, सीमा देवी, राधा देवी, नीता गिरी, कंचन बिष्ट, तनुजा रौतेला, ममता बगारी, सविता देवी और रजनी देवी शामिल रहीं।
कॉर्बेट प्रशासन की यह पहल वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




