उत्तराखण्ड
शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर रामनगर में गूंजी ‘युद्ध नहीं, शांति चाहिए’ की आवाज

रामनगर।
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर रामनगर में एक युद्ध विरोधी आम सभा का आयोजन किया गया। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले शहीद पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए शांति की अपील की गई।
सभा में वक्ताओं ने शहीद भगत सिंह के विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज उठाई थी और आज भी उनके विचार दुनिया को शांति और न्याय का संदेश देते हैं। वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
वक्ताओं ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी संघर्षों पर चिंता जताई और कहा कि इनका असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाकों में हो रहे हमलों और आम नागरिकों के प्रभावित होने की खबरें चिंता का विषय हैं।
सभा में यह भी कहा गया कि वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि सभी देश आपसी बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि वर्तमान परिस्थितियों का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ रहा है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर आम जनता और विभिन्न उद्योगों पर पड़ रहा है।
सभा के अंत में सभी ने एक स्वर में “युद्ध नहीं, शांति चाहिए” का संदेश दिया और विश्व शांति की कामना की।
कार्यक्रम को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, साइंस फॉर सोसाइटी के गिरीश चंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंवाल, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, आइसा के सुमित कुमार और पछास के राज सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।




