उत्तराखण्ड
“रामनगर की खस्ताहाल सड़कों पर कॉर्बेट के पर्यटन कारोबार का एक्सीडेंट”
कॉर्बेट के पर्यटन पर गड्ढों का हमला! क्यारी-छोई सड़कें बदहाल, 21 करोड़ का बजट भी लेप्स—PWD के जवाब पर भड़के रिजॉर्ट्स संचालक
रामनगर। Jim Corbett National Park के आसपास पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। क्यारी और छोई गांव की जर्जर सड़कों ने अब पर्यटन कारोबारियों की कमर तोड़नी शुरू कर दी है।
इसी मुद्दे को लेकर जिम कॉर्बेट रिजॉर्ट्स जीएम एसोसिएशन ने अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग रामनगर को ज्ञापन सौंपा और सड़कों की बदहाल स्थिति पर तीखी नाराज़गी जताई।
एसोसिएशन का कहना है कि सड़कों में इतने गड्ढे हो चुके हैं कि पर्यटकों का सफर “एडवेंचर” नहीं बल्कि “मुसीबत” बन गया है। रिजॉर्ट्स तक पहुंचने वाले पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उनके वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इसका सीधा असर पर्यटन व्यवसाय पर पड़ रहा है।
सिर्फ पर्यटक ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीण भी इन टूटी सड़कों से परेशान हैं। रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब अधिशासी अभियंता ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट था, जिसमें से 21 करोड़ रुपये लेप्स हो गए। बाकी 4 करोड़ को लेकर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए सरकार के पास कोई अलग प्रावधान ही नहीं है।
PWD के इस जवाब से एसोसिएशन संतुष्ट नहीं दिखी और इसे सीधा-सीधा लापरवाही करार दिया। सवाल उठता है कि जब करोड़ों का बजट समय पर खर्च ही नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शाह, उपाध्यक्ष सुंदर सिंह बिष्ट, सचिव किरण सागर समेत कई सदस्य मौजूद रहे।
अब बड़ा सवाल:
जब सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती है, तो क्या इन टूटी सड़कों पर ही “टूरिज्म का भविष्य” चलेगा? या फिर जिम्मेदार विभाग सिर्फ फाइलों में ही विकास दिखाता रहेगा?




