उत्तराखण्ड
‘FIR की धमकी’ में दिखा प्रशासनिक रौब… रामनगर में EO बनाम कांग्रेस नेता आमने-सामने
‘FIR की धमकी’ में दिखा प्रशासनिक रौब… रामनगर में EO बनाम कांग्रेस नेता आमने-सामने
रामनगर के ख़ताड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक बार फिर वही पुराना दृश्य देखने को मिला—बुलडोजर आगे था और ‘अधिकार का अहंकार’ उससे भी आगे।
नगर पालिका परिषद के ईओ आलोक उनियाल इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। जैसे ही कार्रवाई से प्रभावित लोगों के समर्थन में कांग्रेस नेता पुष्कर दुर्गापाल मौके पर पहुंचे, माहौल अचानक बदल गया। आम जनता से संवाद की जगह ईओ साहब ने सीधे ‘कानूनी डंडा’ उठाना ज्यादा उचित समझा।
ईओ ने कांग्रेस नेता को चेतावनी देते हुए कहा—“आगे से हट जाओ, वरना FIR दर्ज करा दूंगा।”
यानि अतिक्रमण हटाने से ज्यादा जरूरी हो गया ‘आवाज हटाना’।
लेकिन सामने विपक्ष था, कोई खामोश तमाशबीन नहीं। पुष्कर दुर्गापाल ने भी बिना झुके जवाब दिया—“करा दीजिये।”
बस, यहीं से मामला साफ हो गया कि यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि ‘रौब बनाम विरोध’ की सीधी टक्कर थी।
सवाल यही है कि क्या प्रशासन का सख्त चेहरा सिर्फ विपक्ष को देखकर ही जागता है? क्या यही सख्ती उन जगहों पर भी दिखती है, जहां अतिक्रमण सालों से ‘सिस्टम की नजरों’ के सामने पलता रहता है?
रामनगर में इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखा दिया कि कानून का इस्तेमाल कब कार्रवाई के लिए होता है और कब ‘दबाव’ बनाने के लिए। और जब कुर्सी पर बैठे अधिकारी संवेदनशीलता छोड़कर सिर्फ चेतावनी की भाषा में बात करते हैं, तो बुलडोजर से पहले भरोसा ही ढह जाता है।




