उत्तराखण्ड
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में विजिलेंस जांच के बाद बड़ा एक्शन, 10 लोगों पर मुकदमे की मंजूरी
देहरादून। हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाया है। जांच में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मंजूरी दे दी गई है। साथ ही तत्कालीन नगर आयुक्त के खिलाफ बर्खास्तगी की संस्तुति और तत्कालीन जिलाधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति के बाद संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अभियोग दर्ज करने का निर्णय लिया गया है।
इन 10 लोगों पर दर्ज होगा मुकदमा
जांच में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, संपत्ति लिपिक वेदपाल तथा मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
इसके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट के अनुसार भूमि खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और निर्णय लेने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गंभीर खामियां पाई गईं। आरोप है कि इससे नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
तत्कालीन डीएम और एसडीएम पर भी कार्रवाई
मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। उन पर अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।
वहीं तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार के अधीन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के मामलों को नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बाद में विस्तृत जांच, वित्तीय ऑडिट और विजिलेंस जांच कराई गई, जिसमें अब कई अधिकारियों और भूमि विक्रेताओं की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
जांच पूरी होने के बाद अब मामले में आपराधिक मुकदमे दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण: प्रमुख बिंदु
10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी।
तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति।
तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट की अनुशंसा।
तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश।
विजिलेंस जांच में धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप प्रथम दृष्टया सामने आए।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा।
फिलहाल यह मामला उत्तराखंड के चर्चित प्रशासनिक मामलों में शामिल हो गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




