उत्तराखण्ड
नैनीताल जिले में स्मैक तस्करी के बड़े मामले का भंडाफोड़!
हल्द्वानी में 1.85 करोड़ की स्मैक पकड़ी गई, लेकिन बड़ा सवाल बरकरार—आखिर देवभूमि में किसके दम पर फल-फूल रहा है नशे का साम्राज्य?
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में स्मैक तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। काठगोदाम क्षेत्र में 618 ग्राम स्मैक के साथ राजस्थान के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद स्मैक की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.85 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह वर्ष 2026 में जिले में पकड़ी गई सबसे बड़ी स्मैक खेपों में से एक मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार काठगोदाम के पश्चिमी खेड़ा क्षेत्र में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास निर्माणाधीन भवन के निकट दो संदिग्धों को रोका गया। तलाशी में उनके कब्जे से 618 ग्राम स्मैक, एक इलेक्ट्रॉनिक तराजू और राजस्थान नंबर की कार बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गजब सिंह (27 वर्ष) और सीताराम (37 वर्ष) निवासी भरतपुर, राजस्थान के रूप में हुई है।
पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी आपस में सगे भाई हैं और कथित तौर पर स्मैक की खेप किसी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए हल्द्वानी आए थे। जांच एजेंसियां अब उस व्यक्ति की तलाश में जुटी हैं जिसे यह खेप सौंपी जानी थी।
उत्तराखंड में बढ़ता ड्रग्स नेटवर्क चिंता का विषय
इस बरामदगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से नशे की बड़ी खेपें लगातार कैसे पहुंच रही हैं। प्रदेश के शहरों में ड्राई नशे और स्मैक का कारोबार तेजी से फैलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
नैनीताल जिले के आंकड़े ही स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। वर्ष 2026 में अब तक स्मैक तस्करी के 31 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस दौरान 2 किलो से अधिक स्मैक बरामद की गई है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
युवाओं को बना रहा है सबसे बड़ा शिकार
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मैक और अन्य सिंथेटिक नशे युवाओं को सबसे तेजी से अपनी गिरफ्त में लेते हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र, बेरोजगार युवा और पार्टी कल्चर की ओर आकर्षित होने वाले लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। नशे की लत न केवल परिवारों को बर्बाद कर रही है बल्कि अपराध और सामाजिक अस्थिरता को भी बढ़ावा दे रही है।
केवल गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना जरूरी
हर कुछ दिनों में बड़ी बरामदगी और गिरफ्तारियां सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद नशे का कारोबार पूरी तरह थमता नहीं दिख रहा। सवाल यह है कि आखिर इन तस्करों के पीछे काम कर रहे बड़े सप्लायर, फाइनेंसर और नेटवर्क ऑपरेटर कौन हैं? जब तक सप्लाई चेन की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक एक खेप पकड़े जाने के बाद दूसरी खेप पहुंचती रहेगी।
देवभूमि उत्तराखंड में बढ़ता नशे का कारोबार अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी गंभीर सवाल बन चुका है।




