उत्तराखण्ड
देहरादून में 45 करोड़ की ठगी: ‘ऑर्किड पार्क’ का सपना बेचकर दुबई भागी बिल्डर राखी मित्तल 5 साल बाद गिरफ्तार
देहरादून में 45 करोड़ की ठगी: ‘ऑर्किड पार्क’ का सपना बेचकर दुबई भागी बिल्डर राखी मित्तल 5 साल बाद गिरफ्तार
देहरादून। राजधानी में रियल एस्टेट के नाम पर आम लोगों के सपनों को बेचकर करोड़ों की ठगी करने वाली कंपनी पुष्पांजलि रियलम्स एंड इंफ्राटेक की मालकिन राखी मित्तल आखिरकार 5 साल बाद दुबई में गिरफ्तार कर ली गई है। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल ठगी कांड का दूसरा मास्टरमाइंड दीपक मित्तल अभी भी फरार है।
VIP कॉलोनी का सपना, असल में ठगी का जाल
सहस्रधारा रोड पर ‘ऑर्किड पार्क’ नाम से एक लग्जरी प्रोजेक्ट का सपना दिखाया गया। दावा—VIP कॉलोनी, प्रीमियम फ्लैट्स और हाई-एंड सुविधाएं। कीमत रखी गई करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रति फ्लैट।
लोगों ने भरोसा किया, बुकिंग कराई, एडवांस दिया… और यहीं से शुरू हुआ ठगी का खेल।
पैसा लिया, प्रोजेक्ट गायब… बिल्डर दुबई रवाना
जैसे-जैसे करोड़ों रुपये कंपनी के खातों में आते गए, वैसे-वैसे ‘ऑर्किड पार्क’ का सपना हवा होता गया।
ना निर्माण, ना साइट पर काम—और फिर अचानक राखी मित्तल और दीपक मित्तल देश छोड़कर दुबई फरार हो गए।
पुलिस का शिकंजा: LOC से लेकर रेड कॉर्नर नोटिस तक
मामला सामने आते ही पुलिस ने दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) और रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया।
इतना ही नहीं, दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
5 साल बाद पहली गिरफ्तारी, दूसरा आरोपी अब भी बाहर
लंबे इंतजार के बाद अब राखी मित्तल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—
दीपक मित्तल कहां है?
क्या वह भी जल्द कानून के शिकंजे में आएगा या फिर सिस्टम को चकमा देता रहेगा?
सवाल सिस्टम पर भी…
यह सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि सिस्टम की निगरानी पर भी बड़ा सवाल है—
कैसे बिना जमीन पर काम किए करोड़ों रुपये की बुकिंग हो गई?
कैसे लोग अपनी जीवनभर की कमाई ऐसे प्रोजेक्ट में झोंकते रहे और कोई जांच नहीं हुई?
अब देखना होगा—क्या पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा, या ‘ऑर्किड पार्क’ हमेशा के लिए एक अधूरा सपना बनकर रह जाएगा?




