उत्तराखण्ड
नशा पिलाकर नाबालिग से दरिंदगी… इंसानियत फिर शर्मसार, ‘दरिंदों’ की टोली का एक आरोपी गिरफ्तार
देहरादून।
समाज में इंसान के चेहरे के पीछे छिपे दरिंदों की असलियत एक बार फिर सामने आ गई है। देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची को नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म करने की शर्मनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले कोई बाहरी राक्षस नहीं, बल्कि उसी समाज में घूमने वाले ऐसे लोग हैं जो दिन में इंसान बनने का ढोंग करते हैं और मौका मिलते ही दरिंदगी पर उतर आते हैं।
मामला कोतवाली पटेलनगर क्षेत्र का है, जहां आजाद कॉलोनी निवासी एक महिला ने 13 मार्च 2026 को पुलिस में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उसकी नाबालिग पुत्री को नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस जघन्य कृत्य में रैफी उर्फ सोनू पुत्र मोहम्मद असलम (उम्र 19 वर्ष) निवासी आईएसबीटी सी-15, आजाद कॉलोनी गली नंबर 3, पटेलनगर देहरादून तथा उसके दो अन्य विधि विवादित किशोर साथी शामिल थे।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 183/2026 के तहत धारा 137(2), 70(2), 123 बीएनएस और 5(छ)/6 पॉक्सो अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रैफी उर्फ सोनू को पटेलनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया, जबकि इस घटना में शामिल उसके दो अन्य नाबालिग साथियों को पुलिस संरक्षण में लिया गया है।
लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर समाज में ऐसे ‘भेड़िए’ पैदा कैसे हो रहे हैं, जो एक मासूम बच्ची को नशा पिलाकर उसकी अस्मत से खेलने की हिम्मत कर लेते हैं?
यह वही समाज है जहां मंचों पर “बेटी बचाओ” के नारे गूंजते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बेटियों की सुरक्षा आज भी सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है।
ऐसे अपराध सिर्फ कानून तोड़ने की घटना नहीं होते, बल्कि इंसानियत की रूह को घायल कर देने वाले कृत्य होते हैं। सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो कुछ युवाओं को दरिंदगी तक ले जाती है।
गिरफ्तार आरोपी
रैफी उर्फ सोनू पुत्र मो0 असलम, निवासी आईएसबीटी सी-15 आजाद कॉलोनी गली नंबर 3, पटेलनगर देहरादून (मूल निवासी ग्राम गजरौला, थाना बस्ती, जिला अमरोहा उ.प्र.), उम्र 19 वर्ष
अन्य आरोपी
घटना में शामिल 02 विधि विवादित किशोर
कार्रवाई करने वाली टीम
व0उ0नि0 प्रमोद शाह
म0उ0नि0 तनुजा शर्मा
का0 अरविंद बर्थवाल
का0 विपिन कुमार
समाज में ऐसे लोगों को देखकर लगता है कि कुछ लोग इंसान की शक्ल में पैदा जरूर होते हैं, लेकिन उनके भीतर की इंसानियत शायद जन्म लेते ही मर चुकी होती है। कानून अपना काम करेगा, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर कब तक हमारी बेटियां ऐसे दरिंदों के बीच डर के साये में जीती रहेंगी?




