उत्तराखण्ड
देहरादून में छात्र की मौत: 7 फरार आरोपियों पर इनाम, पुलिस के हाथ अब भी खाली
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में छात्रों के बीच हुई हिंसक मारपीट अब एक सनसनीखेज आपराधिक मामले में बदल चुकी है। 23 मार्च 2026 की रात केहरी गांव में दो पक्षों के बीच हुए विवाद ने ऐसा खौफनाक रूप लिया कि एक छात्र दिव्यांशु जाटराना की जान चली गई। इलाज के दौरान उसकी मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
इस मामले में परिजनों की तहरीर के आधार पर प्रेमनगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। शुरुआती कार्रवाई में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी और गहरी होती चली गई।
सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ में सामने आया कि इस हिंसक वारदात में कुल 11 लोग शामिल थे। इनमें से 7 आरोपी अब भी फरार हैं और लगातार पुलिस को चकमा दे रहे हैं। हालात ये हैं कि अब इन सभी फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। साथ ही कोर्ट से इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हो चुके हैं।
फरार आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो उत्तराखंड के बाहर भी दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। सवाल यह है कि जब वारदात के बाद नाम सामने आ चुके थे, तो ये आरोपी इतनी आसानी से फरार कैसे हो गए?
ये हैं 7 फरार आरोपी:
ऋतिक राज पुत्र श्याम सिंह, निवासी पूर्वी चंपारण (बिहार), हाल निवासी केहरी गांव, प्रेमनगर
शांतनु कुमार पुत्र प्रभात कुमार, निवासी पटना (बिहार), हाल निवासी केहरी गांव, प्रेमनगर
उज्जवल सिंह पुत्र तनु कुमार, निवासी पटना (बिहार), हाल निवासी केहरी गांव, प्रेमनगर
अंकुर पुत्र पुरुषोत्तम कुमार, निवासी गोपालपुर (बिहार), हाल निवासी सैनिक कॉलोनी फेज-2, प्रेमनगर
आदित्य राज पुत्र प्रभात, निवासी पटना (बिहार), हाल निवासी महिमा एन्क्लेव, केहरी गांव
विनीत राज पुत्र दिनेश सिंह, निवासी भोजपुर (बिहार), हाल निवासी केहरी गांव
प्रहलाद राज पुत्र विनय सिंह, निवासी नवादा (बिहार), हाल निवासी सैनिक कॉलोनी फेज-2
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर छात्र राजनीति और आपसी रंजिश किस हद तक हिंसक हो चुकी है। एक छोटी सी कहासुनी ने एक परिवार से उनका बेटा छीन लिया, जबकि आरोपी अब भी खुलेआम फरार हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इनाम की घोषणा के बाद क्या ये आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं या फिर यह मामला भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।




