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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी की जनसभा में ‘धुरंधर’ वाली राजनीति, दावों और हकीकत के बीच खड़े सवाल

चार साल की उपलब्धियों के दावों के बीच जमीनी हालात पर चर्चा गायब, मंच से गूंजे सिर्फ विकास के बड़े-बड़े दावे

हल्द्वानी, 21 मार्च 2026।
उत्तराखंड सरकार के “चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम के तहत हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज में आयोजित जनसभा में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास और उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त पेश की। मंच से सरकार के कामकाज को लेकर बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी सच्चाई और उन दावों की पड़ताल कहीं नजर नहीं आई।
जनसभा में रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री धामी को “धाकड़ ही नहीं, धुरंधर” बताते हुए सरकार की कार्यशैली और फैसलों को उदाहरण बताया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ मंच से दिए गए विशेषणों से ही किसी सरकार का मूल्यांकन हो सकता है, या फिर जनता की रोजमर्रा की समस्याएं भी उसी रफ्तार से सुलझी हैं, जैसा दावा किया जा रहा है?
कार्यक्रम के दौरान सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन, रोजगार और निवेश जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास होने की बात कही गई। साथ ही राज्य की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आंकड़े भी गिनाए गए। लेकिन इन आंकड़ों के पीछे बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की हालत जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं हुई।
धामी सरकार के प्रमुख फैसलों—यूनिफॉर्म सिविल कोड, नकल विरोधी कानून और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई—को मील का पत्थर बताया गया। हालांकि इन फैसलों के असर और उनसे जुड़े विवादों पर मंच से कोई बात नहीं हुई। खासकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर उठे सवाल और प्रभावित लोगों की स्थिति पर भी चुप्पी रही।
अवैध घुसपैठ और सीमांत क्षेत्रों के विकास की बात जरूर उठाई गई, लेकिन यह भी साफ नहीं किया गया कि इन मुद्दों पर अब तक क्या ठोस और स्थायी समाधान निकला है। “पहाड़ की जवानी और पानी” जैसे नारे फिर दोहराए गए, जो वर्षों से राजनीतिक भाषणों का हिस्सा रहे हैं, लेकिन जमीनी बदलाव अब भी चुनौती बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में निवेश, पर्यटन, स्टार्टअप और रोजगार में बढ़ोतरी के दावे किए और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की बात कही। लेकिन हाल के वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवाल और युवाओं के आंदोलन जैसे मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया।
जनसभा में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें जमरानी बांध, राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी गई। यह प्रस्तुति भविष्य की तस्वीर तो दिखाती है, लेकिन वर्तमान की चुनौतियों पर पर्दा डालती नजर आई।
कार्यक्रम में कई मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे, और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ भी जुटी। लेकिन यह भी चर्चा का विषय बना रहा कि ऐसी जनसभाओं में जुटने वाली भीड़ कितनी स्वाभाविक होती है और कितनी प्रशासनिक प्रयासों का नतीजा।
कुल मिलाकर, हल्द्वानी की इस जनसभा में सरकार के चार साल की उपलब्धियों का जोरदार प्रचार जरूर हुआ, लेकिन उन दावों की पड़ताल और जनता से जुड़े असल मुद्दे मंच से दूर ही रहे।

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