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उत्तराखण्ड

किच्छा में नशे का सौदागर गिरफ्तार: 45 लाख की हेरोइन के साथ दबोचा गया तस्कर, कई राज्यों में फैला नेटवर्क बेनकाब

किच्छा में नशे का सौदागर गिरफ्तार: 45 लाख की हेरोइन के साथ दबोचा गया तस्कर, कई राज्यों में फैला नेटवर्क बेनकाब

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद में एक बार फिर नशे का काला कारोबार उजागर हुआ है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स ने थाना नानकमत्ता पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े नशा तस्कर को धर दबोचा। आरोपी के कब्जे से 151.17 ग्राम अवैध हेरोइन बरामद की गई है, जिसकी क़ीमत क़रीब 45 लाख रुपये बताई जा रही है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान बलदेव सिंह पुत्र रंजीत सिंह निवासी माजरा, थाना कैलाखेड़ा, उम्र 22 वर्ष के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, बलदेव सिंह लंबे समय से हेरोइन की सप्लाई में सक्रिय था और उसके तार उत्तर प्रदेश के रामपुर और उत्तराखंड के कई जिलों से जुड़े हैं।

पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसे यह हेरोइन नानकमत्ता के प्रिंस सिंह से मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि प्रिंस सिंह की मां सुरेंद्र कौर उर्फ जमुना भी पहले से ही नशा तस्करी के मामले में जेल जा चुकी है। यानी यह पूरा परिवार नशे के कारोबार में लिप्त है।

पकड़े गए आरोपी पर पहले से ही थाना मिलक (रामपुर), केलाखेड़ा और गदरपुर में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। STF अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है। शुरुआती जांच में कई और तस्करों के नाम सामने आए हैं, जिन पर अलग से कार्रवाई की जाएगी।

बरामदगी में एक बिना नंबर प्लेट की पल्सर बाइक भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल तस्करी में किया जा रहा था। STF फिलहाल बाइक के रजिस्ट्रेशन और इसके इस्तेमाल की जांच कर रही है।

उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों में नशे के सौदागरों पर लगातार कार्रवाई हो रही है, लेकिन हर गिरफ्तारी के बाद नए नाम सामने आ रहे हैं। यह साफ इशारा है कि राज्य में नशे का नेटवर्क गहराई तक फैला हुआ है — और इसे खत्म करने के लिए अब महज़ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि जड़ से उखाड़ने वाली रणनीति की ज़रूरत है।

अब सवाल ये है –
देवभूमि को नशे से मुक्त करने के तमाम दावे कब ज़मीन पर उतरेंगे?
क्यों हर महीने नए तस्कर, नए नाम और नए नेटवर्क सामने आ रहे हैं?
क्या सिस्टम के भीतर ही कहीं इस नशे का ‘साइलेंट सपोर्ट’ छिपा है?

ATOM BOMB की नज़र में, नशे के खिलाफ जंग सिर्फ पुलिस या किसी एजेंसी की नहीं — ये समाज के हर ज़िम्मेदार नागरिक की लड़ाई है। क्योंकि अगर ये जहर फैलता रहा, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी गिरफ्त से नहीं बच पाएंगी।

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