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उत्तराखण्ड

नशे के धंधे पर चोट-हल्द्वानी में तस्कर की संपत्ति जब्त, अब पुलिस की अगली परीक्षा शुरू

हल्द्वानी/नैनीताल।
नशे के खिलाफ कार्रवाई का दावा करने वाली पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती—बल्कि तस्करों की जड़ों पर वार करने की बात कर रही है। इसी कड़ी में नैनीताल पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी से जुड़ी संपत्ति पर कार्रवाई करते हुए एक वाहन को जब्त कराया है। लेकिन सवाल यह भी है—क्या यह कार्रवाई वाकई सिस्टम को साफ करेगी या सिर्फ कागजों में सख्ती दिखाने का एक और उदाहरण है?

क्या है पूरा मामला?
थाना हल्द्वानी में दर्ज मु०अ०सं०– 359/2025 (धारा 8/20 NDPS Act) के तहत आरोपी नारायण दत्त परगाई (निवासी कुकना, मुक्तेश्वर) के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
जांच अधिकारी उपनिरीक्षक भुवन सिंह राणा ने विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया है।

जांच में खुला “काला खेल”
पुलिस की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन में आरोपी के बेटे सुरेश परगाई के नाम पर तीन वाहन सामने आए—
Ertiga कार (UK04TB-5931)
Honda मोटरसाइकिल (UK04Z-3013)
Hero मोटरसाइकिल (UK04AA-6853)
जांच में इन संपत्तियों के लिए कोई वैध आय का ठोस सबूत नहीं दिया गया। यानी सीधा शक—नशे के पैसे से खड़ी की गई संपत्ति।

दिल्ली से आया जब्ती आदेश
मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने SAFEMA/NDPS सक्षम प्राधिकारी, नई दिल्ली को रिपोर्ट भेजी।
24 मार्च 2026 को आए आदेश में Ertiga कार को अवैध रूप से अर्जित संपत्ति मानते हुए NDPS Act की धारा 68-B(g) और 68-F(1) के तहत जब्त करने का आदेश दिया गया।

बड़ा सवाल: अब आगे क्या?
पुलिस इसे बड़ी कार्रवाई बताकर अपनी पीठ थपथपा सकती है, लेकिन असली सवाल अब भी खड़े हैं—
क्या सिर्फ एक कार जब्त करने से नशे का नेटवर्क टूट जाएगा?
बाकी संपत्तियों पर कब कार्रवाई होगी?
और सबसे बड़ा सवाल—इतने समय तक यह अवैध कमाई सिस्टम की नजर से कैसे बची रही?

जवाबदेही से नहीं बच सकती पुलिस
यह कार्रवाई स्वागत योग्य जरूर है, लेकिन देरी से जागी कार्रवाई कई सवाल छोड़ती है।
अगर पुलिस पहले ही आर्थिक जांच पर ध्यान देती, तो शायद यह नेटवर्क इतना मजबूत नहीं होता।
नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ “छापेमारी” से नहीं जीती जाएगी—
इसके लिए सिस्टम के अंदर झांकना होगा,
👉 जवाबदेही तय करनी होगी,
👉 और हर उस कड़ी को तोड़ना होगा जो इस धंधे को जिंदा रखती है।
नैनीताल पुलिस की यह कार्रवाई एक संकेत है—अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति पर वार होगा।
लेकिन अगर यह अभियान लगातार और निष्पक्ष नहीं चला, तो यह भी सिर्फ एक “एक्शन” बनकर रह जाएगा, न कि समाधान।
(खुशाल सिंह रावत, संपादक – एटम बम)

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