उत्तराखण्ड
देहरादून में विदेशी महिलाओं का फर्जी दस्तावेज रैकेट बेनकाब, नेपाल बॉर्डर से अवैध एंट्री का खुलासा
देहरादून में “ऑपरेशन क्रैकडाउन” के तहत बड़ा खुलासा हुआ है, जहां फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे अवैध रूप से रह रही तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। मामला राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मीडिया सेल से जारी जानकारी के मुताबिक, रायपुर क्षेत्र में सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस को सांई कॉम्पलैक्स के एक फ्लैट में तीन विदेशी महिलाएं संदिग्ध हालात में मिलीं। वैध दस्तावेज मांगने पर वे कोई प्रमाण पेश नहीं कर सकीं, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में महिलाओं की पहचान ईरीका (किर्गिस्तान), करीना और निगोरा नीम (दोनों उज्बेकिस्तान) के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि ईरीका वर्ष 2023 में एक साल के वीजा पर भारत आई थी, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद भी देश में अवैध रूप से रह रही थी। वहीं करीना और निगोरा नेपाल बॉर्डर के रास्ते गैरकानूनी तरीके से भारत में दाखिल हुई थीं और दिल्ली समेत कई शहरों में ठिकाने बदलती रहीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तीनों महिलाओं ने भारत में अपने परिचितों की मदद से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेज तैयार करा लिए थे। तलाशी में इनके पास से पासपोर्ट, फर्जी आधार-पैन कार्ड, एसबीआई पासबुक, मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा बरामद हुई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी निगोरा को पहले भी बिहार में फर्जी दस्तावेजों के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह दोबारा अवैध रूप से भारत में रहने लगी।
तीनों महिलाएं पिछले 6-7 महीनों से देहरादून में अलग-अलग जगहों पर रह रही थीं। पूछताछ के दौरान उन लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने इनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।
फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह मामला साफ संकेत देता है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ हो सकता है।




