उत्तराखण्ड
4 करोड़ की ठगी, किसान की मौ*त… और पुलिस पर ही सवाल! दो दरोगा सस्पेंड, 26 पर FIR—लेकिन वर्दी अब भी सुरक्षित?
काशीपुर (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड में एक बार फिर वर्दी की कार्यप्रणाली सवालों के कटघरे में है। पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। मामले में दो सब-इंस्पेक्टर्स को निलंबित किया गया है और 26 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है—लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरोप सीधे पुलिस पर थे, तो FIR में किसी भी पुलिसकर्मी का नाम क्यों नहीं?
वीडियो में लगाए गंभीर आरोप, फिर चली गोली
किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो जारी कर सनसनीखेज आरोप लगाए थे। वीडियो में उसने कहा कि जमीन के नाम पर उससे 4 करोड़ रुपये की ठगी हुई। जब वह न्याय की आस लेकर थाने पहुँचा, तो पैगा चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह बिष्ट और आईटीआई थाना इंचार्ज कुंदन सिंह रौतेला ने कथित तौर पर उसे प्रताड़ित किया, उल्टा आरोपियों से सांठ-गांठ कर ली।
इतना ही नहीं, सुखवंत ने जिले के पुलिस कप्तान पर भी गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद उसने हल्द्वानी के एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। एक किसान की मौत—और सिस्टम में हड़कंप।
निलंबन हुआ, लेकिन जवाब अधूरा
मामला तूल पकड़ते ही सवालों के घेरे में आए पुलिस कप्तान ने दोनों दरोगाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। प्रशासन ने राहत की सांस ली—पर जनता नहीं।
क्योंकि निलंबन कार्रवाई है, न्याय नहीं।
26 पर FIR… पर पुलिस का नाम गायब
इस पूरे प्रकरण में काशीपुर कोतवाली में 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस पुलिस पर सीधे आरोप लगे, वही FIR से बाहर।
तो क्या यह जांच है या लीपापोती?
क्या किसान की मौत के बाद भी वर्दी कानून से ऊपर रहेगी?
सवाल जो जवाब मांगते हैं
अगर आरोप झूठे थे, तो दरोगा सस्पेंड क्यों?
अगर आरोप सही थे, तो FIR में पुलिसकर्मी क्यों नहीं?
क्या वीडियो में लगाए आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
काशीपुर में हुए इस मामले ने साफ कर दिया है कि कागजी कार्रवाई से गुस्सा शांत नहीं होगा। किसान की मौत सिर्फ एक आत्महत्या नहीं—यह सिस्टम पर लगा आरोप है।
अब देखना यह है कि न्याय की गोली चलेगी या मामला फाइलों में दफन हो जाएगा।




