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देहरादून में करोड़ों की जमीन धोखाधड़ी का खुलासा, बाप-बेटा पहुंचे जेल

देहरादून में करोड़ों की जमीन धोखाधड़ी का खुलासा, बाप-बेटा पहुंचे जेल

देहरादून | 16 जुलाई 2025
राजधानी देहरादून में एक बार फिर जमीन माफियाओं की सुनियोजित ठगी का पर्दाफाश हुआ है। फर्जी दस्तावेजों और झूठे दावे के सहारे करोड़ों की ठगी करने वाले बाप-बेटे की जोड़ी – अमरीश ओबेरॉय और प्रणव ओबेरॉय को कोतवाली नगर पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला?
विष्णु विहार, विकास नगर निवासी वादी वर्णित अग्रवाल ने कोतवाली नगर थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए कुआंवाला क्षेत्र में भूमि खरीदने का निर्णय लिया था। इस दौरान उनके परिचित विजय सिंह परमार ने उन्हें ओबेरॉय परिवार से मिलवाया, जिन्होंने जमीन बेचने की इच्छा जताई।

अमरीश ओबेरॉय, उनका बेटा प्रणव और श्रवण ओबेरॉय—तीनों ने दावा किया कि उनके पास विवाद रहित और बैंक लोन से मुक्त ज़मीन है। विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने कूटरचित फर्द (भूमि संबंधी फर्जी दस्तावेज) भी दिखाए और सौदा तय कर लिया गया। पीड़ित से 1 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपये की मोटी रकम वसूल कर भूमि की रजिस्ट्री भी करवा दी गई।

जब रजिस्ट्री के बाद टूटा सपना
रजिस्ट्री होने के बाद वादी जब दाखिल-खारिज कराने संबंधित विभाग पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि उसी ज़मीन पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का लोन पहले से ही चल रहा है। यानी ओबेरॉय परिवार ने बंधक भूमि को फर्जी दस्तावेजों के दम पर बेच दिया था।

यह न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि एक सोची-समझी भूमि माफिया स्टाइल ठगी है जिसमें वादकारी के साथ करोड़ों की ठगी की गई।

एसएसपी की सख्ती का असर, माफिया पहुँचे सलाखों के पीछे
इस प्रकरण में कोतवाली नगर पुलिस ने सघन जांच के बाद अमरीश ओबेरॉय और उनके पुत्र प्रणव ओबेरॉय को 16 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम:

  1. अमरीश कुमार ओबेरॉय पुत्र सरदारी लाल ओबेरॉय, निवासी 2ए, रेसकोर्स, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, देहरादून
  2. प्रणव ओबेरॉय पुत्र अमरीश कुमार ओबेरॉय, निवासी 2ए, रेसकोर्स, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, देहरादून

प्रश्नचिन्हों में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और बैंक का रोल
इस धोखाधड़ी ने राजस्व विभाग, बैंकिंग सिस्टम और रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं की गंभीर खामियों को उजागर किया है। जब भूमि पहले से बैंक के पास बंधक थी, तो फिर रजिस्ट्री कैसे हो गई? क्या संबंधित विभागों की मिलीभगत के बिना यह संभव था?

सिर्फ दो गिरफ्तारी नहीं, बड़े नेटवर्क की जांच जरूरी
यह मामला संकेत देता है कि देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बैंकों में बंधक ज़मीनों की अवैध बिक्री की एक बड़ी श्रृंखला चल रही है। यह केवल बाप-बेटे का व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि एक संगठित भू-माफिया गिरोह की संभावना है जिसकी जड़ें रजिस्ट्रार, बैंक अधिकारियों और दलालों तक जाती हैं। यदि पुलिस इसी तरह कार्रवाई करती रही तो कई और चेहरों से भी नकाब उतर सकता है।


🔴 “एटम बम” की टिप्पणी:
यह मामला उत्तराखंड की राजधानी में रियल एस्टेट सेक्टर में चल रही उस खामोश लूट की झलक है, जिसमें कागजों का जाल बिछाकर लोगों की जिंदगी की जमापूंजी हड़पी जा रही है। अब देखना होगा कि जमीन बेचने वाले तो जेल गए, लेकिन उनके पीछे जो सिस्टम खड़ा है—वो कब कटघरे में आएगा?

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