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उत्तराखण्ड

देहरादून में गैंगवार की स्क्रिप्ट: जिम जॉइन कर की रेकी, फिर मॉल के बाहर गोलियों से भून डाला विक्रम शर्मा!

देहरादून का डालनवाला इलाका 13 फरवरी को सिर्फ गोलियों की आवाज से नहीं दहला था, बल्कि उस दिन अपराध की दुनिया की एक ठंडी और सोची-समझी पटकथा सामने आई थी। सिल्वरसिटी मॉल के बाहर हुई विक्रम शर्मा की हत्या कोई अचानक हुआ वारदात नहीं थी, बल्कि महीनों से बुनी जा रही खूनी साजिश का क्लाइमेक्स था।

जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे बदले, वर्चस्व और रंगदारी की काली कहानी छिपी थी। झारखंड के कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा, जो पहले से हत्या, रंगदारी और गैंगवार जैसे कई मामलों में आरोपी था, उसे खत्म करने की तैयारी कई राज्यों में घूम-घूमकर की गई। लेकिन जब जमशेदपुर और नोएडा में मौका नहीं मिला, तो साजिशकर्ताओं ने देहरादून को ही “एक्जीक्यूशन ग्राउंड” बना डाला।

जिम बना मौत का जाल

इस पूरी साजिश की सबसे खौफनाक परत यह है कि हत्यारों ने विक्रम शर्मा की दिनचर्या पर महीनों नजर रखी। साजिश में शामिल एक आरोपी ने उसी जिम को जॉइन कर लिया, जहां विक्रम रोज आता था। यानी दोस्ती की आड़ में मौत की घात लगाई जा रही थी।
घटना वाले दिन भी उसी आरोपी ने फोन पर अपने साथियों को सूचना दी कि “टारगेट जिम में है” — और इसके बाद बाहर निकलते ही गोलियों से भून दिया गया।

हरिद्वार से स्कूटी-बाइक, फिर स्कॉर्पियो से फरार

हत्या के बाद भागने की प्लानिंग भी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। पहले से हरिद्वार में रेंट पर ली गई बाइक और स्कूटी से हत्यारे भागे, फिर वहां खड़ी काली स्कॉर्पियो से नोएडा पहुंच गए। भुगतान तक यूपीआई आईडी से किया गया, ताकि सब कुछ सामान्य दिखे और पुलिस को चकमा दिया जा सके।

बदला, वर्चस्व और अपराध की ‘ब्रांडिंग’

पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह और भी चौंकाने वाली है। आरोपियों के मुताबिक, जेल में विक्रम शर्मा के करीबी से विवाद के बाद बदले की आग भड़क उठी थी। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता आशुतोष अपराध की दुनिया में अपना नाम और धाक जमाना चाहता था।
कहा जा रहा है कि विक्रम शर्मा की हत्या को अपराध की दुनिया में “एंट्री और पावर शो” के तौर पर प्लान किया गया — यानी किसी की हत्या, किसी का करियर बनाने का जरिया!

रंगदारी और ठेके का खेल भी आया सामने

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक कारोबारी, जिसकी कंपनी रेलवे में फूड सप्लाई का ठेका चलाती थी, वह भी विक्रम से परेशान था। विक्रम कथित तौर पर उस ठेके को हथियाना चाहता था और रंगदारी मांग रहा था। यही विवाद इस साजिश को और हवा देता गया।

कौन गिरफ्तार, कौन फरार

इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब तक अक्षत ठाकुर और राजकुमार को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है, जबकि आशुतोष, अंकित वर्मा, विशाल सिंह, आकाश प्रसाद, यशराज और जितेंद्र साहु अभी भी फरार हैं। इन सभी पर इनाम घोषित किया गया है।

देहरादून बना गैंगवार का नया मैदान?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देहरादून अब बाहरी गैंगों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है?
एक कुख्यात अपराधी जमानत पर घूमता है, महीनों उसकी रेकी होती है, जिम में घुसकर दोस्त बनते हैं, और फिर मॉल के बाहर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी जाती है — ये सिर्फ एक वारदात नहीं, बल्कि सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
देहरादून की शांत सड़कों पर गैंगवार की यह पटकथा बता रही है कि अपराध अब सीमाओं में नहीं बंधा, बल्कि राज्य से राज्य घूमकर अपना हिसाब बराबर कर रहा है।
अब देखना होगा कि फरार आरोपी कब तक कानून से भागते हैं, या फिर ये कहानी भी बाकी गैंगवार की फाइलों की तरह लंबी और अधूरी ही रह जाएगी।

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