उत्तराखण्ड
देहरादून में गैंगस्टर नेटवर्क का खुलासा: जेल में बंद सुनील राठी के इशारे पर चल रही थी जमीनों पर उगाही की स्क्रिप्ट! शूटर समेत दो गिरफ्तार
देहरादून। राजधानी की सड़कों पर घूम रही एक संदिग्ध स्कॉर्पियो ने उस अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की परतें खोल दीं, जो बताती हैं कि अपराधी भले सलाखों के पीछे हों, लेकिन उनका आतंक अब भी जमीनों और कारोबारियों की धड़कनों पर राज कर रहा है। उत्तराखण्ड एसटीएफ और दून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को अवैध हथियारों के साथ दबोचा गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार अभियुक्त पारस पहले मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग का शूटर रह चुका है और बाद में सुनील राठी गैंग में शामिल होकर उसी अपराध की विरासत को आगे बढ़ा रहा था। यानी गैंग बदले, चेहरे बदले, लेकिन खेल वही—धमकी, दहशत और उगाही!
जेल में बंद गैंगस्टर, बाहर चल रहा ‘ऑपरेशन उगाही’
पूछताछ में सामने आया है कि दोनों आरोपी देहरादून और हरिद्वार की बेशकीमती विवादित जमीनों में हस्तक्षेप कर गैंगस्टर सुनील राठी के नाम पर मोटी उगाही कर रहे थे। मोबाइल जांच में जेल में बंद राठी से लगातार संपर्क की बात सामने आई है। इससे साफ है कि जेल की दीवारें इन गैंगस्टरों के लिए महज औपचारिकता हैं, असली कमान अब भी उनके हाथ में ही है।
सूत्र बताते हैं कि कई व्यापारी और प्रॉपर्टी डीलर लगातार इनसे परेशान थे, लेकिन राठी गैंग के खौफ ने किसी को शिकायत करने की हिम्मत नहीं दी। यह वही खामोशी है, जिसमें अपराध फलता-फूलता है और कानून का डर सिकुड़ता जाता है।
राजपुर में चेकिंग के दौरान दबोचे गए आरोपी
26 फरवरी 2026 को राजपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान संदिग्ध स्कॉर्पियो से
भानू चौधरी (सहारनपुर)
पारस (मुजफ्फरनगर)
को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 02 अवैध पिस्टल (.32 बोर) और 07 जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस का मानना है कि ये देहरादून में किसी बड़ी वारदात की फिराक में थे।
अपराध का लंबा काला इतिहास
गिरफ्तार शूटर पारस पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं। यानी यह कोई छोटा-मोटा बदमाश नहीं, बल्कि पेशेवर अपराध की दुनिया का पक्का खिलाड़ी है, जो एक गैंग से दूसरे गैंग में शिफ्ट होकर अपना नेटवर्क मजबूत करता रहा।
जमीन माफिया, गैंगस्टर और जेल कनेक्शन – बड़ा गठजोड़?
पूछताछ में हरिद्वार के एक विवादित प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी सामने आया है, जो खुद हत्या के मामले में जेल जा चुका है और सुनील राठी के संपर्क में बताया जा रहा है। इससे यह शक गहराता है कि जमीनों के विवाद अब सिर्फ सिविल केस नहीं रहे, बल्कि संगठित अपराध का बड़ा धंधा बन चुके हैं, जहां गैंगस्टर, शूटर और प्रॉपर्टी नेटवर्क मिलकर दहशत का कारोबार चला रहे हैं।
सवाल बड़ा है – जेल में बंद गैंगस्टर कैसे चला रहा था नेटवर्क?
यह गिरफ्तारी कई असहज सवाल भी छोड़ गई है।
क्या जेल में बंद अपराधियों का नेटवर्क अब भी सक्रिय है?
क्या विवादित जमीनें गैंगस्टरों की नई कमाई का अड्डा बन चुकी हैं?
और सबसे अहम—आखिर किसके संरक्षण में यह उगाही का खेल बेखौफ चलता रहा?
देहरादून और हरिद्वार में जमीनों पर कब्जे और उगाही के पीछे चल रहे इस गैंगस्टर मॉडल का खुलासा बताता है कि अपराध अब सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि फाइलों, डीलों और डर के साए में पनप रहा है।
यह गिरफ्तारी एक चेतावनी भी है—कि अगर समय रहते इस नेटवर्क की जड़ों तक कार्रवाई नहीं हुई, तो विवादित जमीनें आने वाले समय में गैंगवार और खूनी संघर्ष का नया मैदान बन सकती हैं।




