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उत्तराखण्ड

45 दिन में 5 लाख लोगों तक पहुंची सरकार! ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का रिकॉर्ड के साथ समापन

681 शिविरों के जरिए 33 हजार से ज्यादा शिकायतों का मौके पर समाधान, 50 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त

देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू किया गया ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान 45 दिनों की अवधि पूरी करते हुए शुक्रवार को अभूतपूर्व रिकॉर्ड के साथ सम्पन्न हो गया। इस दौरान प्रदेशभर में आयोजित 681 शिविरों के माध्यम से सरकार सीधे जनता तक पहुंची और पांच लाख से अधिक लोगों ने इसमें भागीदारी निभाते हुए सरकारी सेवाओं का लाभ लिया।
यह अभियान दिसंबर माह से लगातार 45 दिनों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में चलाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य था—जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत दिलाना और प्रशासन को उनके द्वार तक पहुंचाना। इसी सोच के साथ सरकार ने गांव-गांव और कस्बों में शिविर लगाकर जन समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का दावा किया।

33 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर निस्तारण

अभियान के दौरान कुल 51,053 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 33,755 शिकायतों का शिविर स्थल पर ही निस्तारण कर दिया गया। इसके अलावा विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए 74,184 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, करीब तीन लाख लोगों ने इन शिविरों के जरिए अलग-अलग सरकारी सेवाओं का लाभ भी उठाया।
अकेले समापन दिवस पर प्रदेशभर में 11 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 8,209 नागरिकों ने भाग लिया और अपनी समस्याएं दर्ज कराईं।

‘दफ्तर नहीं, प्रशासन खुद पहुंचे जनता के पास’—मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह संदेश देते रहे हैं कि जनता को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन खुद उनके द्वार तक पहुंचे। इसी नीति के तहत इस विशेष अभियान की शुरुआत की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही यह विशेष अभियान समाप्त हो गया हो, लेकिन अधिकारियों को लगातार जनता के संपर्क में रहकर शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के लिए ‘सफलता’, जनता के लिए ‘सुविधा’ का दावा

प्रदेश सरकार इस अभियान को अपनी बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, पांच लाख से अधिक लोगों तक सीधी पहुंच और हजारों शिकायतों का मौके पर समाधान इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक मशीनरी को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की कोशिश की गई।
अब देखना यह होगा कि शिविरों में दर्ज हुई शेष शिकायतों और आवेदनों पर आगे कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और क्या यह अभियान वाकई जनता के स्थायी राहत का माध्यम बन पाता है या नहीं।

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