उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में ड्राई नशे का जाल कितना गहरा? नैनीताल जिले में दो करोड़ से अधिक की स्मैक बरामद, युवाओं को निगल रहा नशे का कारोबार
उत्तराखंड में ड्राई नशे का अवैध कारोबार लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी बीच नैनीताल जिले में 600 ग्राम से अधिक स्मैक की बरामदगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राज्य में नशे का नेटवर्क कितना बड़ा और कितना संगठित हो चुका है।
पुलिस द्वारा जारी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नैनीताल एसओजी और थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कथित तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। उनके कब्जे से लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत की 600 ग्राम से ज्यादा स्मैक बरामद की गई है। यह वर्ष 2026 में अब तक उत्तराखंड की सबसे बड़ी स्मैक बरामदगी बताई जा रही है।
हालांकि इस मामले में विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में स्मैक की बरामदगी यह संकेत देती है कि प्रदेश में नशे का कारोबार केवल छोटे स्तर पर नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स की सप्लाई चेन जितनी मजबूत होती है, उतनी ही तेजी से उसकी पहुंच युवाओं तक बढ़ती है।
युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा
उत्तराखंड के कई शहरों में पिछले कुछ वर्षों में ड्राई नशे का चलन तेजी से बढ़ा है। स्मैक, हेरोइन, कोकीन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गए हैं। छोटे शहरों और कस्बों में भी इनकी उपलब्धता बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
नशे की गिरफ्त में आने वाले अधिकांश युवक पढ़ाई, रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर होते चले जाते हैं। कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं। नशे की लत के कारण चोरी, लूट, हिंसा और अन्य अपराधों में भी बढ़ोतरी की आशंकाएं जताई जाती रही हैं।
केवल गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी बरामदगी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ प्रदेश तक पहुंच कैसे रहे हैं? इनके पीछे कौन लोग हैं? सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है? और किन रास्तों से युवाओं तक यह जहर पहुंचाया जा रहा है?
नैनीताल में हुई यह बरामदगी केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड में तेजी से फैल रहे ड्राई नशे के संकट की गंभीर चेतावनी भी है। राज्य में बढ़ती नशाखोरी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना और युवाओं को नशे से बचाने के लिए व्यापक सामाजिक अभियान चलाना भी जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल पूरे मामले के संबंध में विस्तृत जानकारी और गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क का खुलासा होना बाकी है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस बड़े ड्रग्स नेटवर्क की पहुंच आखिर कहां तक फैली हुई है।




