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उत्तराखण्ड

काशीपुर की ‘फर्जी कंपनी फैक्ट्री’ बेनकाब! पुरानी फर्म के नाम पर 5 कंपनियां बनाकर जमीन खेल – आयुक्त ने दिए कड़े एक्शन के आदेश

हल्द्वानी में हुई जनसुनवाई में ऐसा मामला फूटा कि पूरे कुमाऊं में ज़मीन के खेल पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया। मंगलवार को आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत के सामने आई शिकायतों में सबसे गंभीर शिकायत काशीपुर की एक कंपनी नेटवर्क को लेकर रही, जहां पुरानी फर्म का सहारा लेकर नई-नई कंपनियां खड़ी कर जमीन खरीदने का खेल चलने का आरोप लगा है।

 

पुरानी फर्म, नई कंपनियां और जमीन का ‘कानूनी जुगाड़’!

शिकायत के मुताबिक, एक पुरानी फर्म के दस्तावेजों का आधार बनाकर 5 नई कंपनियां रजिस्टर की गईं। फिर इन्हीं कंपनियों के जरिए भू-कानून का कथित उल्लंघन करते हुए अलग-अलग जगहों पर जमीन खरीदी गई। यहीं खेल खत्म नहीं हुआ — इन जमीनों के कागजों के आधार पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र तक बनवाने की कोशिश का आरोप है।
मतलब साफ है —
पहले कंपनी बनाओ, फिर जमीन खरीदो, फिर उसी जमीन के कागज से “स्थानीय” बन जाओ!
अगर शिकायत सही निकली तो यह सिर्फ जमीन खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि सिस्टम को घुमा देने वाली सुनियोजित रणनीति मानी जाएगी।
आयुक्त दीपक रावत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए उपजिलाधिकारी को तत्काल जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। साफ शब्दों में कहा गया कि ऐसा कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं होगा और जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

बस अड्डा, मंदिर और जाम का जंजाल

जनसुनवाई में हल्द्वानी रोडवेज बस अड्डे के बाहर सड़कों पर बसें खड़ी कर सवारियां भरने की शिकायत भी गूंजी। इससे मुख्य मार्ग पर रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बस स्टेशन के बाहर मुख्य सड़क पर सवारियां नहीं बैठाई जाएंगी और पुलिस को नियमित चेकिंग के निर्देश दिए गए।
कालूसिद्ध मंदिर के आसपास ठेला-रेहड़ी से लगने वाले जाम पर भी कार्रवाई के आदेश हुए।

घटिया टाइल्स और सड़क की गुणवत्ता पर सवाल

रामनगर मालधचौड़ क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा लगाए जा रहे इंटरलॉकिंग टाइल्स की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे। इस पर अधिशासी अभियंता को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

धोखाधड़ी के मामलों में मौके पर पैसे वापसी

भूमि खरीद-फरोख्त और धन लेनदेन से जुड़े कुछ मामलों में जनसुनवाई के दौरान ही संबंधित लोगों से शिकायतकर्ताओं को रकम वापस कराई गई, चेक सौंपे गए — जिससे कई पीड़ितों को तुरंत राहत मिली।
लेकिन इस पूरी जनसुनवाई की सबसे बड़ी गूंज एक ही रहीका शीपुर की कंपनियों के जरिए जमीन और निवास नियमों के कथित खेल की।

अब निगाहें जांच पर टिकी हैं। अगर आरोप साबित हुए, तो यह मामला सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि जमीन कानूनों के दुरुपयोग के पूरे मॉडल का पर्दाफाश बन सकता है।

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