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उत्तराखण्ड

मोबाइल स्क्रीन की महाभारत: अब चुनावी जंग मंचों से निकलकर रील्स और एल्गोरिद्म तक पहुंची?


हल्द्वानी के एक बड़े होटल में मंच सजा था, सामने कैमरे थे, मोबाइल थे, कंटेंट क्रिएटर्स थे, इंफ्लूएंसर्स थे और बीच में थे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। कार्यक्रम का नाम था – “सोशल मीडिया मंथन विथ सीएम धामी”। नाम में मंथन था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी रही कि इस मंथन से निकलने वाला अमृत आखिर किसके हिस्से में जाएगा और विष किसके?
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में युवाओं को सोशल मीडिया को राष्ट्र निर्माण, सकारात्मक बदलाव और उत्तराखंड की पहचान मजबूत करने का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फेक नैरेटिव, भ्रामक सूचनाओं और समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने युवाओं को प्रदेश का डिजिटल ब्रांड एम्बेसडर बनने की भी बात कही।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, नकल विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और भू-कानून जैसे फैसलों को सरकार की उपलब्धि बताया। अपने संबोधन में उन्होंने लैंड जिहाद, थूक जिहाद और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी जोर दिया।
लेकिन राजनीति में मंच पर कही गई बातों से ज्यादा दिलचस्प मंच के बाहर चल रही चर्चाएं होती हैं।
प्रदेश में 2027 के चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी तैयारी के इंजन ने शायद अभी से गर्म होना शुरू कर दिया है। कभी पोस्टर, बैनर और नुक्कड़ सभाएं चुनावी हथियार हुआ करती थीं, अब लगता है उनकी जगह धीरे-धीरे रील्स, शॉर्ट वीडियो और वायरल हैशटैग ले रहे हैं। पहले नेता जनता तक पहुंचने की कोशिश करते थे, अब लड़ाई शायद एल्गोरिद्म तक पहुंचने की भी हो गई है।
सोशल मीडिया पर सरकार के आलोचक आरोप लगाते रहे हैं कि असहमति की आवाजों को लेकर दबाव का माहौल बनाया जाता है, हालांकि इन आरोपों पर सरकार की ओर से अलग रुख सामने आता रहा है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चले कुछ ट्रेंड्स ने भी राजनीतिक चर्चाओं को गर्म रखा।
दिलचस्प सवाल अब यह नहीं कि सोशल मीडिया कितना ताकतवर है। सवाल यह है कि मोबाइल की स्क्रीन पर चल रही लड़ाई में कौन ज्यादा प्रभावशाली साबित होगा — सरकार का “पॉजिटिव नैरेटिव” या जनता का “अनफ़िल्टर्ड कमेंट सेक्शन”?
क्योंकि आज के दौर में राजनीति का नया गणित शायद यही है —
जिसके पास ज्यादा सीटें हों वह सरकार बनाता है, लेकिन जिसके पास ज्यादा रीच हो, वह नैरेटिव बनाता है।

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