उत्तराखण्ड
रामनगर में उपखनिज ट्रांसपोर्ट कारोबार ठप: ट्रांसपोर्टरों ने खड़ंजा गेट जड़ा, RBM रेट बढ़ाने की मांग पर अड़े
रामनगर में उपखनिज ट्रांसपोर्ट कारोबार ठप: ट्रांसपोर्टरों ने खड़ंजा गेट जड़ा, RBM रेट बढ़ाने की मांग पर अड़े
रामनगर। क्षेत्र में उपखनिज कारोबार आज अचानक थम गया जब उपखनिज ट्रांसपोर्टरों के समूह ने खड़ंजा गेट बंद कर दिया, जिससे RBM की निकासी पूरी तरह रुक गई। गेट पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं और खनन से जुड़ा पूरा सिस्टम जाम हो गया।
मामला साफ है — ट्रांसपोर्टर बनाम स्टोन क्रशर। और इस बार ट्रांसपोर्टरों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
रेट घटा, गुस्सा बढ़ा
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि स्टोन क्रशर मालिक मनमानी कर रहे हैं।
जहां पहले RBM धुलान का रेट ₹21 प्रति कुंतल दिया जा रहा था, वहीं अब इसे घटाकर सिर्फ ₹16 प्रति कुंतल कर दिया गया है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि:
“डीजल महंगा, टायर महंगे, मेंटेनेंस महंगा… लेकिन हमारा भाड़ा घटा दिया गया। ये सीधा-सीधा शोषण है।”
उनका साफ कहना है कि मौजूदा रेट पर गाड़ियां चलाना घाटे का सौदा है।
खड़ंजा गेट बना आंदोलन का अड्डा
आज सुबह से ही ट्रांसपोर्टर गाड़ियों सहित गेट पर डटे रहे। नतीजा —
उपखनिज की एक भी खेप बाहर नहीं निकली
क्रशर यूनिट्स को कच्चा माल नहीं मिला
पूरे इलाके में खनन से जुड़ी सप्लाई चेन हिल गई
“हम मजदूर नहीं, पार्टनर हैं”
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ ढुलाई करने वाला मजदूर समझा जा रहा है, जबकि असल में पूरा सिस्टम उनकी गाड़ियों पर टिका है।
उनकी मांग है कि RBM धुलान का रेट तुरंत बढ़ाया जाए, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस हस्तक्षेप सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है —
क्या खनन माफिया और क्रशर लॉबी के सामने ट्रांसपोर्टरों की आवाज दबाई जा रही है?
स्थिति साफ है:
रामनगर में उपखनिज का पहिया तब तक नहीं घूमेगा जब तक रेट की लड़ाई का फैसला नहीं होता।
आने वाले दिनों में ये आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।




