उत्तराखण्ड
“NCERT की जगह ‘ACERT’ का खेल: 10 करोड़ की नकली किताबों का जखीरा पकड़ा, बच्चों की पढ़ाई से हो रहा था बड़ा खिलवाड़”
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां पुलिस ने करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की नकली NCERT पुस्तकों का विशाल जखीरा बरामद किया है। यह मामला सिर्फ फर्जी किताबों का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे सुनियोजित खिलवाड़ का है।
14 मार्च की रात रुद्रपुर कोतवाली पुलिस आनंदम रिजॉर्ट के पास चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक कैंटर वाहन को रोका गया, जिसमें बड़ी मात्रा में किताबें भरी हुई थीं। वाहन चालक ने बताया कि वह किताबें मेरठ से लेकर आया है, लेकिन जब पुलिस ने दस्तावेजों की जांच की तो मामला संदिग्ध नजर आने लगा। चालक के पास ई-वे बिल नहीं था और जो बिल प्रस्तुत किए गए, उनमें भी स्पष्ट गड़बड़ी दिखाई दी। शक गहराने पर पुलिस ने वाहन की तलाशी ली, जिसमें भारी मात्रा में NCERT की किताबें पाई गईं।
पूछताछ के बाद चालक पुलिस को एक गोदाम तक लेकर पहुंचा। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जब गोदाम का निरीक्षण किया गया तो वहां करीब 10 लाख किताबों का भंडारण मिला। जांच में सामने आया कि गोदाम राजेश कुमार जैन का है, जिसे संदीप नाम के व्यक्ति को किराये पर दिया गया था। यहां से जो किताबें बरामद हुईं, वे देखने में असली जैसी थीं, लेकिन असलियत कुछ और ही थी।
दिल्ली से आई NCERT की टीम ने जब इन पुस्तकों की जांच की तो साफ हो गया कि यह पूरा खेल बेहद शातिर तरीके से रचा गया था। किताबों की छपाई, कागज, बाइंडिंग और कवर डिजाइन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि असली NCERT के नाम पर “ACERT” छापकर बाजार में सप्लाई की जा रही थी, ताकि आम लोग आसानी से धोखा खा जाएं। यानी यह सिर्फ नकली प्रोडक्ट नहीं, बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी का नेटवर्क था।
NCERT टीम द्वारा पुस्तकों को नकली घोषित किए जाने के बाद रुद्रपुर कोतवाली में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसकी सप्लाई चेन की पड़ताल कर रही है, जिससे यह साफ हो सके कि यह धंधा कितने बड़े स्तर पर फैला हुआ था।
इस कार्रवाई पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने टीम की सराहना करते हुए 20 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है, लेकिन इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतने बड़े स्तर पर नकली किताबों का कारोबार कब से चल रहा था, किन-किन बाजारों में ये किताबें पहुंच चुकी हैं और अब तक कितने छात्रों की पढ़ाई इससे प्रभावित हुई है, यह जांच का विषय है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि मुनाफे के लालच में किस तरह शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। नकली किताबों के इस खेल ने न सिर्फ अभिभावकों और छात्रों के भरोसे को तोड़ा है, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।




