उत्तराखण्ड
दून में ज़हर का धंधा: शादी में परोसने जा रहे थे 300 किलो नकली पनीर-दही, बड़ा सप्लाई नेटवर्क बेनकाब
देहरादून में सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाला एक खतरनाक खेल सामने आया है। बाजार, होटल और शादियों की रौनक बढ़ाने के नाम पर लोगों की थाली में ज़हर परोसने की तैयारी चल रही थी। मामला सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से नकली डेयरी प्रोडक्ट्स की सप्लाई चेन खड़ी करने का है, जो उत्तराखण्ड से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैली बताई जा रही है।
300 किलो “नकली सेहत” गाड़ियों में भरकर घूम रही थी
सेलाकुई क्षेत्र में चेकिंग के दौरान दो लग्जरी कारों से जो बरामद हुआ, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए—
250 किलो नकली पनीर और 50 किलो नकली दही।
यानि सीधे-सीधे लोगों की थाली, बच्चों के पेट और बीमारों की सेहत पर हमला।
यह माल किसी ढाबे की पिछली गली से नहीं, बल्कि शादी की बुकिंग में सप्लाई होने जा रहा था। मतलब साफ है—
“मुनाफा बढ़ाओ, चाहे बारातियों को अस्पताल क्यों न पहुंचाना पड़े।”
सैंपलिंग में खुली पोल
खाद्य विभाग की टीम ने मौके पर जांच की तो पनीर और दही नकली पाए गए। बाद में इन्हें नष्ट किया गया। लेकिन बड़ा सवाल ये है—
अब तक ऐसा माल कितनी शादियों, होटलों और कैटरिंग में खप चुका होगा?
पीछे कौन है असली मास्टरमाइंड?
पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे यह माल अन्य सप्लायर्स से खरीदकर ला रहे थे। नाम सामने आए हैं:
बाबर (लक्सर)
दिनेश लुथरा (नेहरू कॉलोनी)
यानी यह कोई छोटी-मोटी मिलावट नहीं, बल्कि संगठित सप्लाई रैकेट का संकेत है, जहां:
नकली दूध उत्पाद बनते हैं
थोक में सप्लाई होते हैं
और फिर शादी-ब्याह, होटल, ढाबों में खपा दिए जाते हैं
असली खतरा क्या है?
नकली पनीर-दही में अक्सर पाया जाता है:
डिटर्जेंट
सिंथेटिक केमिकल
यूरिया
स्टार्च और सस्ता तेल
ये सब मिलकर:
फूड पॉइजनिंग
किडनी-लिवर डैमेज
बच्चों में गंभीर संक्रमण
तक का कारण बन सकते हैं।
सिस्टम पर भी बड़ा सवाल
यह धंधा एक दिन में खड़ा नहीं होता।
इतनी बड़ी मात्रा में नकली डेयरी प्रोडक्ट बनाना, स्टोर करना, सप्लाई करना—
क्या बिना लोकल नेटवर्क, गोदाम और खरीदारों की मिलीभगत के संभव है?
कितने होटल, कितने कैटरर, कितने आयोजक सस्ते माल के लालच में आंखें बंद किए बैठे हैं?
गिरफ्तार आरोपी
वसीम (28), टर्नर रोड, देहरादून
प्रदीप कुमार (44), शंकरपुर, सहसपुर
दोनों कारों को सीज किया गया है और मामला दर्ज हुआ है।
असली खबर यह है:
यह सिर्फ “एक पकड़” नहीं, बल्कि शादियों और होटलों में चल रहे नकली खाने के अंडरग्राउंड कारोबार की झलक है।
जब तक इस नेटवर्क के ऊपर बैठे असली सरगनाओं, गोदामों और खरीददारों पर कार्रवाई नहीं होती—
लोगों की प्लेट में असली खाना नहीं, मिलावटी मौत ही परोसी जाती रहेगी।




