उत्तराखण्ड
काशीपुर में खनन माफिया पर सियासी विस्फोट: सड़क पर बैठे नेता प्रतिपक्ष, पुलिस पर सीधे आरोप
काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) की सड़कों पर दौड़ते खनिज से भरे बेलगाम डंपर अब सिर्फ ट्रैफिक का हिस्सा नहीं, बल्कि लोगों की मौत का कारण बन चुके हैं। लगातार हो रही दर्दनाक दुर्घटनाओं ने जनता का गुस्सा उबाल पर पहुँचा दिया है, और यही गुस्सा देर शाम ढकिया में सड़क पर फूट पड़ा — जब खुद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या धरने पर बैठ गए।
मामला सिर्फ एक हादसे का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो इन मौतों के बाद भी जागता नहीं। ढकिया में खनन से लदे डंपर की चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौत के बाद माहौल भड़क गया। लोगों ने सड़क जाम की, और इसी बीच नेता प्रतिपक्ष मौके पर पहुँचकर सीधे सड़क पर बैठ गए। यह कोई औपचारिक विरोध नहीं था, बल्कि खुली सियासी चुनौती थी।
जब पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे तो नज़ारा असहज कर देने वाला था। यशपाल आर्या ने खड़े अफसरों से कहा — “ज़मीन पर बैठने की आदत डाल लीजिए, जनता नीचे बैठी है, आप भी नीचे बैठकर बात कीजिए।” यह संवाद प्रतीक था उस दूरी का, जो जनता और प्रशासन के बीच बढ़ चुकी है।
आर्या ने साफ आरोप लगाया कि खनन से भरे ओवरलोड डंपर खुलेआम सड़कों पर मौत बाँट रहे हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारी से तीखे शब्दों में कहा कि इन वाहनों पर सख्ती इसलिए नहीं होती क्योंकि “इनसे पैसा मिलता है।” अधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन आर्या यहीं नहीं रुके। उनका जवाब था — “मुझे मत समझाइए, मैं 40 साल से राजनीति में हूँ, सत्ता भी देखी है, विपक्ष भी… सब समझता हूँ।”
यह बयान सिर्फ एक नेता का गुस्सा नहीं, बल्कि उस जनभावना की आवाज है जो अब डर और खामोशी से बाहर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपर रफ्तार, ओवरलोडिंग और लापरवाही का चलता-फिरता बम हैं। सड़कें मानो ट्रकों के लिए खुली हैं, इंसानों के लिए नहीं।
इससे पहले कुंडेश्वरी और आसपास के इलाकों में भी ऐसे ही हादसे हो चुके हैं। सिर्फ पिछले 2–3 दिनों में पाँच लोगों की जान खनन डंपरों की वजह से जा चुकी है। सवाल सीधा है — जब मौतें गिनती में बदल जाएँ, तब भी सिस्टम की नींद क्यों नहीं टूटती?
ढकिया का यह धरना साफ संकेत है कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक या खनन का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और कथित मिलीभगत पर खुला आरोप बन चुका है। जनता पूछ रही है — सड़कें आखिर चलाने के लिए हैं या कुचलने के लिए?




