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उत्तराखण्ड

रामनगर | बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में भवानीगंज में जन सम्मेलन, संघर्ष तेज करने का ऐलान

रामनगर :भवानीगंज रामलीला मैदान में आयोजित बुलडोजर राज के खिलाफ जन सम्मेलन में विभिन्न जन संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाइयों पर सवाल उठाए। वक्ताओं ने इन कार्रवाइयों को जन विरोधी बताते हुए कहा कि किसी भी कार्रवाई में संविधान, कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। सम्मेलन में एकजुट होकर लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया।
जन सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों में की जा रही बुलडोजर कार्रवाइयों के खिलाफ सड़क से लेकर न्यायालय तक आवाज उठाई जाएगी। साथ ही उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी पैरवी किए जाने का भी फैसला लिया गया। वक्ताओं ने आगामी एक माह के भीतर गढ़वाल क्षेत्र में भी इसी मुद्दे पर जन सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविंद्र गढ़िया ने कहा कि जमीनों के वास्तविक मालिक जनता हैं और सरकार व प्रशासन की जिम्मेदारी उनका संरक्षण करना है, न कि बिना समुचित प्रक्रिया के बेदखल करना। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनावी संदर्भ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वक्ताओं ने प्रदेश में वनाधिकार कानून 2006 को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि जो लोग वर्षों से जहां निवास, खेती या कारोबार कर रहे हैं, उन्हें वहीं मालिकाना अधिकार दिया जाना चाहिए। पूछड़ी समेत अन्य स्थानों से हटाए गए लोगों के पुनर्वास की मांग भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 7 दिसंबर को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्टे आदेश के बावजूद बुलडोजर कार्रवाई की गई। उन्होंने न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की आवश्यकता पर जोर देते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इसके अलावा सम्मेलन में अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच, तथा जंगली जानवरों से इंसानों, फसलों और मवेशियों की सुरक्षा के मुद्दे भी उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि विकास और कानून-व्यवस्था के नाम पर की जाने वाली कार्रवाइयों में मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए।
कार्यक्रम को जन कवि बल्ली सिंह चीमा, महिला किसान अधिकार मंच की हीरा जंगपांगी, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, उत्तराखंड सेवा समिति पूछड़ी के उर्वादत्त नैनवाल, वन गूजर युवा ट्राइबल संगठन के अध्यक्ष अमीर हमज़ा, सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस के मुकुल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
सम्मेलन का संचालन रेनू सैनी और ललित उप्रेती ने किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उन नीतियों के खिलाफ है जो आम लोगों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करती हैं।

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