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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

रामनगर (नैनीताल), 8 मई:
राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच रामनगर में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की। संयुक्त संघर्ष समिति, रामनगर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए हाल के घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रतिनिधिमंडल में समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी व मो. आसिफ, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की संयोजिका ललिता रावत, समाजवादी लोक मंच के महेश जोशी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल कुमार सहित कई लोग शामिल रहे।
ज्ञापन में हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं—चम्पावत में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण, पौड़ी के सतपुली और नैनीताल के खैरना में पुलिस कार्रवाई से जुड़े विवाद, तथा टिहरी के लंबगांव में सांप्रदायिक तनाव—का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने चम्पावत मामले में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले में सामने आ रही परस्पर विरोधी जानकारियों से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है, इसलिए सच्चाई सामने लाना आवश्यक है।
सतपुली और खैरना की घटनाओं को लेकर ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पुलिस कार्रवाई के बाद युवकों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने की घटनाएं चिंताजनक हैं। इन मामलों में निष्पक्ष जांच, संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को सहायता देने की मांग की गई।
वहीं टिहरी जिले के लंबगांव में आगजनी और सांप्रदायिक तनाव की घटना का हवाला देते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, पीड़ित को सुरक्षा और मुआवजा देने की मांग भी रखी गई।
ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने सरकार से आग्रह किया कि सभी मामलों में पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कानून व्यवस्था को लेकर जनता का भरोसा बहाल किया जाए।

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