Connect with us

उत्तराखण्ड

रामनगर तहसील का ‘सिस्टम’ या किसी एक का साम्राज्य? 17-18 साल से जमे संविदाकर्मी पर आरोप, कार्रवाई शून्य!

शिकायत सही साबित—काम हुआ, लेकिन आरोपी पर चुप्पी… क्या राजस्व अधिकारियों का संरक्षण? संपत्ति जांच की उठी मांग

रामनगर/नैनीताल (एटम बम रिपोर्ट):
रामनगर तहसील से सामने आया एक मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुका है। आरोप एक ऐसे संविदाकर्मी पर हैं, जो वर्षों से सिस्टम के भीतर बैठकर “फाइलों की दिशा” तय करने की ताकत रखता है—और हैरानी की बात ये कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई नदारद है।

कौन हैं राकेश चौधरी?

राकेश चौधरी, रामनगर तहसील कार्यालय में संविदाकर्मी/कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि—
वह करीब 17 से 18 वर्षों से तहसील में लगातार जमे हुए हैं
संविदा पद पर होने के बावजूद दाखिल-खारिज जैसे अहम कार्यों पर उनका प्रभाव बताया जाता है
तहसील के कई कामकाज में उनकी भूमिका “निर्णायक” होने के आरोप हैं
(नोट: ये सभी आरोप शिकायत पत्र और स्थानीय स्रोतों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच का विषय है।)

क्या हैं आरोप?
शिकायतकर्ता गणेश दत्त सती द्वारा जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कई गंभीर बातें कही गईं—
वर्ष 2005 में खरीदी गई भूमि का दाखिल-खारिज वर्षों तक लंबित रखा गया
कई बार दस्तावेज देने के बावजूद फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया
फाइल दबाने/गायब करने जैसे आरोप
शिकायतकर्ता को बार-बार चक्कर लगवाने और टालमटोल करने के आरोप
अधिकारियों का नाम लेकर गुमराह करने की बात
शिकायत में यह भी कहा गया कि—तहसील में सैकड़ों दाखिल-खारिज के मामले लंबित हैं और इसके पीछे “एक ही व्यक्ति की पकड़” जिम्मेदार बताई गई

शिकायत के बाद क्या हुआ?
यहीं से कहानी दिलचस्प भी है और चिंताजनक भी—
शिकायत के बाद शिकायतकर्ता का दाखिल-खारिज कार्य पूरा कर दिया गया
लेकिन…
आरोपित कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
जांच की दिशा अचानक धीमी पड़ गई
सूत्रों और शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक—
जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से समझौता करवा लिया
और शिकायत को “वापस लेने” की स्थिति बना दी गई

बड़ा सवाल—संविदाकर्मी या ‘सिस्टम कंट्रोलर’?
सबसे अहम सवाल यहीं खड़ा होता है—
एक संविदा कर्मचारी 17-18 साल तक एक ही जगह कैसे टिक सकता है?
उसे इतना प्रभाव/पावर किसने और क्यों दी?
क्या बिना “ऊपर के संरक्षण” के ऐसा संभव है?
अगर आरोपों में सच्चाई है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की जवाबदेही का मुद्दा बनता है।

संपत्ति और प्रभाव—जांच की मांग
शिकायत में यह भी मांग उठाई गई है कि—
राकेश चौधरी की चल-अचल संपत्ति की निष्पक्ष जांच हो
यह भी देखा जाए कि एक संविदाकर्मी के तौर पर उनकी आय और जीवनशैली में कोई असामान्य अंतर तो नहीं
(यह मांग शिकायत का हिस्सा है, जिसकी पुष्टि और जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी है।)

रामनगर तहसील का यह मामला तीन सीधे सवाल खड़े करता है—
काम होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता से समझौता क्यों कराया गया?
क्या आरोपी को राजस्व अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है?
अगर सिस्टम में सब कुछ ठीक है, तो पारदर्शी जांच से किसे डर है?
रामनगर तहसील का यह मामला सिर्फ एक फाइल या एक शिकायत की कहानी नहीं है…
यह उस सिस्टम की झलक है, जहां—
काम तो हो जाता है, लेकिन सवाल पूछने की कीमत चुकानी पड़ती है
अब देखना यह होगा कि—
क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करता है
या फिर यह भी एक “फाइल” बनकर सिस्टम में दब जाएगी

बहरहाल राकेश चौधरी अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और मनगढंत करार देते हैं.

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

संपादक –

नाम: खुशाल सिंह रावत
पता: भवानीगंज, रामनगर (नैनीताल)
दूरभाष: 9837111711
ईमेल: [email protected]

You cannot copy content of this page