उत्तराखण्ड
खुलासा-ढाई लाख के विवाद में दोस्त ही बन बैठे जल्लाद
ढाई लाख के विवाद में दोस्त ही बन बैठे जल्लाद: रेसकोर्स के कमरे में पीट-पीटकर हत्या, जंगल में दफनाया शव
देहरादून।
पैसों के लेन-देन का विवाद इस कदर खूनी मोड़ लेगा, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था। दोस्ती के नाम पर बुलाया, नशे की महफिल सजाई और फिर उसी कमरे में लोहे की रॉड, हथौड़े और पेचकस से हमला कर 28 वर्षीय युवक दिगंबर धीमान की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को कंबल में लपेटकर टैक्सी की डिग्गी में ठूंसा गया और चिड़ियापुर के जंगलों में नहर किनारे रेत में दबाकर कहानी खत्म करने की कोशिश की गई।
मामला देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र का है, जहां शास्त्री नगर निवासी संत राम धीमान ने 11 फरवरी को अपने बेटे दिगंबर के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने दोस्ती और इंसानियत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए।
गुमशुदगी से हत्या तक का खौफनाक सफर
9 फरवरी को दिगंबर कोर्ट की तारीख पर जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। धीरे-धीरे यह सामने आया कि जिन साथियों के साथ वह अक्सर बैठता था, वही अचानक गायब हो गए। संदेह गहराया तो पता चला कि उसी रात दिगंबर अपने साथियों के साथ टैक्सी से कहीं गया था।
पूछताछ में टैक्सी चालक ने जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था—कंबल में लिपटा एक शव, रात के अंधेरे में जंगलों की ओर सफर और फिर रेत में दबाकर लौट आना। निशानदेही पर चिड़ियापुर के जंगलों से दिगंबर का शव बरामद हुआ।
रेसकोर्स के कमरे में बना मौत का प्लान
जांच में खुलासा हुआ कि ढाई लाख रुपये के लेन-देन को लेकर दिगंबर और उसके साथियों के बीच विवाद चल रहा था। पैसे वापस मांगने पर टालमटोल से गुस्साए तीनों आरोपियों—हेमंत सेमवाल, आदिल और वैभव उर्फ संजू—ने 9 फरवरी की रात उसे रेसकोर्स स्थित कमरे में बुलाया।
पहले साथ बैठकर नशा किया गया, फिर पैसों की बात छिड़ी और देखते ही देखते हमला शुरू हो गया। लोहे की रॉड, हथौड़े और पेचकस से लगातार वार किए गए। खून बहता रहा, दर्द से तड़पता युवक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन कमरे में मौजूद ‘दोस्त’ जल्लाद बन चुके थे। ज्यादा खून बहने से उसकी मौत हो गई।
15 हजार में खरीदी गई खामोशी
हत्या के बाद सबूत मिटाने की पटकथा भी वहीं लिखी गई। परिचित टैक्सी चालक को बुलाकर 15 हजार रुपये में शव ठिकाने लगाने की डील की गई। चारों ने शव को कंबल में लपेटकर गाड़ी की डिग्गी में डाला, रास्ते में हत्या में इस्तेमाल हथियार और जूते पुल से नीचे सूखी नदी में फेंके और शव को जंगल में दबा दिया।
सोचा था कि मामला हमेशा के लिए दब जाएगा, लेकिन सच की मिट्टी ज्यादा देर तक नहीं दबती।
आरोपी पकड़े गए, लेकिन सवाल बाकी
21 फरवरी को हरिद्वार बाईपास रोड के पास से तीनों मुख्य आरोपी—हेमंत सेमवाल (37), आदिल (38) और वैभव भट्ट उर्फ संजू (25)—को पकड़ा गया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड, हथौड़ा और मृतक के जूते बरामद किए गए।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि मुख्य आरोपी हेमंत और आदिल पहले से ही गंभीर आपराधिक मामलों और एनडीपीएस एक्ट के केस में नामजद रह चुके हैं। यानी यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि आपराधिक प्रवृत्ति का खतरनाक विस्तार था।
नशा, लालच और अपराध की त्रिकोणीय साजिश
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस खतरनाक सामाजिक सड़ांध का आईना है जहां नशा, पैसों का लालच और अपराधी मानसिकता मिलकर दोस्ती को भी मौत का सौदा बना देती है।
जिस कमरे में साथ बैठकर हंसी-ठिठोली होती थी, वहीं खून बहा… और जिन हाथों ने कभी कंधे पर हाथ रखा होगा, उन्हीं हाथों ने हथौड़ा उठाकर जान ले ली।
दिगंबर की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आज की दोस्ती सिर्फ पैसों तक सीमित रह गई है? और क्या नशे की मंडलियां अब अपराध की फैक्ट्री बन चुकी हैं?




