उत्तराखण्ड
तूफान की मार: रामनगर में 11 साल के मासूम की पेड़ से दबकर मौत, कई जगह नुकसान
तूफान की मार: रामनगर में 11 साल के मासूम की पेड़ से दबकर मौत, कई जगह नुकसान
रामनगर।
रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में बीती रात आए तेज तूफान और आंधी ने भारी तबाही मचा दी। इस तूफान में रिंगौड़ा गांव में एक 11 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई जगह मकानों, गाड़ियों और बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार कानू उपाध्याय पुत्र प्रकाश उपाध्याय बीती रात घर से बाहर बाथरूम जाने निकला था। तभी अचानक तेज हवा के कारण पास खड़ा हल्दू का पेड़ टूटकर उस पर गिर गया। पेड़ के नीचे दबने से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना घर की दहलीज पर ही हुई, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पेड़ की लॉपिंग (कटाई-छंटाई) को लेकर कई बार वन विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पेड़ की छंटाई कर दी जाती, तो शायद यह मासूम आज जिंदा होता।
इसी तूफान में टेड़ा चौकी निवासी स्वर्गीय नरेंद्र उर्फ नर दा के घर को भी भारी नुकसान पहुंचा। तेज आंधी में उनके घर की टिन शेड की छत उड़ गई। नर दा रामनगर में टी स्टाल चलाते थे और उनका निधन 6 मार्च 2026 को हुआ था। परिवार अभी उनके गम से उबर भी नहीं पाया था कि 17 मार्च को होने वाले पीपलपानी से ठीक पहले यह नई मुसीबत आ गई।
वहीं दुर्गापुरी क्षेत्र में एक दीवार गिरने से कई कारें क्षतिग्रस्त हो गईं। तेज तूफान के कारण शहर और आसपास के इलाकों में कई जगह पेड़ गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई।
इस तूफान ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि शहर और गांवों में खतरनाक पेड़ों की पहचान और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक जिम्मेदार विभागों की नींद क्यों नहीं खुलती?
रामनगर की यह रात एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख बन गई। एक मासूम की मौत के साथ यह सवाल भी हवा में तैर रहा है कि क्या इस हादसे के लिए किसी की जिम्मेदारी तय होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।




