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उत्तराखण्ड

“जन-जन की सरकार” का ढोल, जमीनी हकीकत का रोल! चिन्यालीसौड़ में शिविर, मंच से घोषणाओं की बौछार


चिन्यालीसौड़/उत्तरकाशी।
सरकार का दावा है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान से आम लोगों को राहत मिल रही है और प्रशासन पहले से ज्यादा सुलभ व पारदर्शी हुआ है। गुरुवार को विकासखंड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अभियान का शुभारंभ किया और मंच से कई बड़े दावे व घोषणाएं कर डालीं।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की शिकायतें सुनते हुए मौके पर ही अधिकारियों की मौजूदगी में कई समस्याओं के निस्तारण का दावा किया गया। सरकार के मुताबिक अब तक 600 से अधिक शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें 5 लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी और 40 हजार से अधिक लाभार्थियों को योजनाओं का सीधा फायदा मिलने की बात कही गई। दावा यह भी कि अब दूर-दराज के लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि गांव-गांव में ही समाधान मिल जाएगा।
लेकिन सवाल वही पुराना—क्या शिविरों की चमक के बाद भी जमीनी दिक्कतें सच में खत्म होंगी या फिर फाइलों में ही समाधान दर्ज रह जाएगा?

हेली सेवा और सेना संचालन का बड़ा ऐलान

कार्यक्रम में सबसे बड़ी घोषणा चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टी को सेना के माध्यम से संचालित करने की योजना को लेकर हुई। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश में हेली सेवा का विस्तार होगा और आगामी चारधाम यात्रा से पहले व्यवस्थाएं मजबूत की जाएंगी। अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर भी मंच से तैयारियों का भरोसा दिया गया, जबकि स्थानीय हितधारकों—पुजारियों, होटल व्यवसायियों और टैक्सी यूनियनों—को यात्रा की असली रीढ़ बताया गया।

महिला सशक्तिकरण और ‘लखपति दीदी’ का जिक्र

सरकार ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान का प्रमुख चेहरा बताते हुए दावा किया कि अब तक दो लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में सशक्त किया गया है और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्थानीय मांगों पर आश्वासन की राजनीति

स्थानीय लोगों की मांग पर सीएचसी चिन्यालीसौड़ और महाविद्यालय के उच्चीकरण को मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि यह देखना होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कब तक उतरती हैं या फिर सिर्फ मंचीय वादों तक सीमित रह जाती हैं।

अफसरशाही का दावा: “ऑनलाइन फॉलोअप से होगा समाधान”

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि जिन समस्याओं का मौके पर समाधान नहीं हो पा रहा, उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर नियमित फॉलोअप के जरिए निस्तारित किया जाएगा। संयुक्त टीमों के गठन की बात भी कही गई, ताकि ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याएं तुरंत सुलझाई जा सकें।

बड़ा सवाल
शिविर, घोषणाएं और आंकड़ों की लंबी सूची—लेकिन असली कसौटी अब भी वही है:
क्या “जन-जन के द्वार” सच में सरकार पहुंचेगी या फिर जनता को ही सरकारी दरवाजों के चक्कर काटने पड़ेंगे?
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे, लेकिन जनता की नजर अब घोषणाओं पर नहीं, उनके क्रियान्वयन पर टिकी है।

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