Connect with us

उत्तराखण्ड

बैलपोखरा फायरिंग के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार!

कालाढूंगी (नैनीताल): कालाढूंगी क्षेत्र में चली गोलियों ने इलाके की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हल्द्वानी रोड स्थित बैलपोखरा तिराहे के पास 14 फरवरी 2026 की रात कुछ लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट के साथ फायरिंग तक की नौबत आ गई। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

क्या है पूरा मामला?

डायल 112 पर मिली सूचना के मुताबिक बैलपोखरा गांव जाने वाले तिराहे के पास कुछ व्यक्तियों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर झगड़ा हुआ और इस दौरान फायरिंग की गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को घटनास्थल खाली मिला, लेकिन जमीन पर पड़े खोखे इस बात की गवाही दे रहे थे कि वहां गोलियां चली थीं। पूरी घटना की वीडियोग्राफी की गई और खोखे कब्जे में लिए गए।
दो दिन बाद 16 फरवरी को ग्राम बच्चीनगर निवासी बलजीत कौर ने तहरीर देकर तीन नामजद आरोपियों—
रंजीत सिंह, मनदीप सिंह उर्फ मंगा और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी समेत एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इसके बाद कालाढूंगी कोतवाली में FIR संख्या 17/2026 धारा 109(1)/126(1)/352/351(3) BNS के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ।

रंजिश ने लिया हिंसक रूप, बुलाकर किया हमला

जांच में सामने आया कि वादिनी के पति लवप्रीत के मित्र हरभजन और आरोपी रंजीत सिंह के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी। इसी रंजिश को सुलझाने के नाम पर आरोपियों को घटनास्थल पर बुलाया गया। लेकिन बातचीत की जगह गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान आरोपियों ने फायरिंग कर दी, जिससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

हथियारों के साथ गिरफ्तारी, कई खोखे बरामद

20 फरवरी को गडप्पू बैरियर के पास से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी में इनके पास से अवैध असलहे और जिंदा कारतूस बरामद हुए—
गुरप्रीत सिंह से 01 देशी पिस्टल व 02 कारतूस
रंजीत सिंह से 01 देशी पिस्टल व 02 कारतूस
मनदीप सिंह से .22 बोर तमंचा व 01 कारतूस
घटनास्थल से 32 बोर के 11 खोखे और .22 बोर के 02 खोखे
इसके बाद आरोपियों पर आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 में अलग से मुकदमा दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए हैं।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने

गिरफ्तार आरोपी रंजीत सिंह पहले भी मारपीट और धमकी जैसे मामलों में नामजद रह चुका है। इससे साफ है कि इलाके में सक्रिय कुछ दबंग तत्व लगातार विवादों और हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं, लेकिन समय रहते इन पर लगाम नहीं लग पाई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन आरोपियों के पास अवैध हथियार पहुंचे कैसे? क्या इलाके में अवैध असलहों का नेटवर्क सक्रिय है? और अगर पुरानी रंजिश की जानकारी पहले से थी तो ऐसे टकराव को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
घटना यह भी दिखाती है कि छोटी-सी रंजिश किस तरह खुलेआम गोलियों तक पहुंच रही है और आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। बैलपोखरा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रात के अंधेरे में हुई फायरिंग ने स्थानीय लोगों के मन में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

कालाढूंगी की यह घटना सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि उस बढ़ती प्रवृत्ति का संकेत है जहां निजी दुश्मनी सुलझाने के नाम पर कानून हाथ में लिया जा रहा है। अवैध हथियारों की उपलब्धता और रंजिश आधारित हिंसा, दोनों ही प्रशासनिक निगरानी और कानून-व्यवस्था की चुनौती बनकर सामने आए हैं। अब देखना यह होगा कि ऐसे मामलों पर सख्त और स्थायी कार्रवाई कब तक धरातल पर दिखती है, ताकि सड़कों पर गोलियों की गूंज दोबारा न सुनाई दे।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

संपादक –

नाम: खुशाल सिंह रावत
पता: भवानीगंज, रामनगर (नैनीताल)
दूरभाष: 9837111711
ईमेल: [email protected]

You cannot copy content of this page